
Dehradun News : Uttarakhand News : MDDA Survey : राजधानी देहरादून में आवासीय भवनों में दुकानें और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाने वाले कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की तैयारी चल रही है और संबंधित प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए जा रहे हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन का हवाला दिया जा रहा है। कार्रवाई आगे बढ़ने पर उन दुकानदारों और छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है…जिनका परिवार इन व्यवसायों पर निर्भर है।

विधानसभा चुनाव से पहले यह मामला सरकार और जनप्रतिनिधियों के लिए भी चुनौती बन गया है। एक ओर न्यायालय के आदेश का पालन करना है वहीं दूसरी ओर प्रभावित कारोबारियों को राहत देने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
आवासीय उपयोग के लिए बने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने का मामला उठने के बाद देहरादून में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई है। बड़ी संख्या में कारोबारियों को नोटिस मिलने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कारोबार बंद करने की नौबत आती है तो दुकानदारों के साथ-साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों पर भी असर पड़ सकता है।
मामले को लेकर देहरादून के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल के आवास पर बैठक हुई। इसमें राजपुर विधायक एवं कैबिनेट मंत्री खजान दास, मसूरी विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, कैंट विधायक सविता कपूर समेत अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी बैठक में बुलाया गया।
बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए प्रभावित कारोबारियों के लिए राहत का रास्ता कैसे निकाला जा सकता है। जनप्रतिनिधियों की चिंता है कि कार्रवाई का दायरा बढ़ने पर बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है।
देहरादून के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि विदेशों में भी घरों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जाती हैं और देश में भी बड़ी संख्या में लोग इस तरह अपना रोजगार चला रहे हैं। ऐसे में प्रभावित लोगों को राहत देने के विकल्प तलाशने की जरूरत है।
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने कहा कि सरकार लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रही है। ऐसे में कारोबार शुरू करने वाले लोगों के सामने यदि फैसलों के कारण मुश्किलें आती हैं, तो उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले का समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।
इस मामले का असर पर्यटन नगरी मसूरी में भी देखने को मिल सकता है। यहां आवासीय भवनों में होटल, रेस्तरां, होमस्टे और बीएनबी यानी बेड एंड ब्रेकफास्ट संचालित करने वाले कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने भवनों के वास्तविक उपयोग की जांच के लिए सर्वे शुरू किया है। इस प्रक्रिया में 200 से अधिक प्रतिष्ठानों के जांच के दायरे में आने की संभावना जताई जा रही है। नोटिस मिलने के बाद स्थानीय होमस्टे और बीएनबी संचालक भी चिंतित हैं। उनका रोजगार और कारोबार में किया गया निवेश प्रभावित होने की आशंका है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे में आने वाले कारोबारियों को राहत देने के लिए सरकार क्या रास्ता निकालती है। क्या मौजूदा नियमों के तहत कारोबारियों को राहत मिल सकती है या उन्हें अपनी व्यावसायिक गतिविधियों में बदलाव करना पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल कारोबारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है।



