
Medical Admission | Uttarakhand High Court | SC Reservation : उत्तराखंड में पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण पर अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड के मूल निवासी अभ्यर्थी के पास राज्य के सक्षम अधिकारी की ओर से जारी वैध अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र है तो उसे राज्य के मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश के दौरान आरक्षण का लाभ मिल सकता है।

यह आदेश हरिद्वार निवासी डॉ. युगेंद्र कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले का निस्तारण करते हुए काउंसलिंग बोर्ड को याचिकाकर्ता के जाति प्रमाणपत्र और उत्तराखंड के मूल निवासी होने की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
याचिका में डॉ. सिंह ने बताया कि वह उत्तराखंड के मूल निवासी हैं और अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। उन्हें 14 अगस्त 2018 को हरिद्वार के तहसीलदार की ओर से एससी प्रमाणपत्र जारी किया गया था। इसके बावजूद पीजी मेडिकल पाठ्यक्रम में राज्य कोटे के तहत प्रवेश के दौरान उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा रहा था।
याचिकाकर्ता ने वर्ष 2026 की नीट-पीजी परीक्षा में 720 में से 88 अंक हासिल किए हैं। उन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि राज्य काउंसलिंग में उनके वैध जाति प्रमाणपत्र के आधार पर एससी श्रेणी में पात्रता पर विचार किया जाए।
याचिका में यह भी कहा गया कि केवल इस वजह से उन्हें आरक्षण से वंचित नहीं किया जाना चाहिए कि उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई उत्तराखंड से बाहर स्थित किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल संस्थान से की है।
मामले में कोर्ट ने काउंसलिंग बोर्ड को प्रमाणपत्र की वैधता और याचिकाकर्ता के मूल निवास की जांच करने को कहा है। इन दोनों शर्तों के पूरा होने पर उन्हें उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में पीजी मेडिकल प्रवेश के लिए एससी आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।



