
Uttarakhand Education | Minority Education | Religious Syllabus : उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने धार्मिक शिक्षा के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसमें धर्म और धार्मिक मान्यताओं के साथ भारतीय इतिहास, संस्कृति, राष्ट्रवाद तथा स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े विषय भी शामिल किए गए हैं। फिलहाल इस प्रारूप को शिक्षा विभाग की मंजूरी मिलने का इंतजार है।

प्राधिकरण की ओर से कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम पहले तैयार किया गया था। अब कक्षा 9 से 12 तक के लिए भी पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। इसे मंजूरी के लिए शिक्षा विभाग के पास भेजा जाना है।
प्रस्तावित पाठ्यक्रम में धार्मिक विषयों के अलावा भारत की ऐतिहासिक विरासत, संस्कृति और देश की आजादी में योगदान देने वाली प्रमुख हस्तियों को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य धार्मिक शिक्षा के दायरे में इन विषयों की जानकारी देना है।
पाठ्यक्रम को मंजूरी मिलने के बाद इसके संचालन से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल इसे लागू किए जाने की अंतिम तारीख स्पष्ट नहीं है।
प्राधिकरण की ओर से पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षा आयोजित करने और विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र देने की व्यवस्था प्रस्तावित है। हालांकि इन प्रमाणपत्रों की मान्यता किन संस्थानों में होगी और उनसे जुड़ी शर्तें क्या होंगी….इस बारे में अभी आधिकारिक जानकारी स्पष्ट नहीं है।
धार्मिक शिक्षा को वैकल्पिक रखने की बात भी कही गई है। यानी विद्यार्थी अपनी इच्छा से इसका चयन कर सकेंगे। नियमित पढ़ाई के साथ इसे किस तरह संचालित किया जाएगा….इसकी जानकारी मंजूरी और क्रियान्वयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार है और अब शिक्षा विभाग की मंजूरी की प्रतीक्षा है।
प्राधिकरण का दावा है कि इस तरह का धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम तैयार करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन सकता है। हालांकि इसे देश का पहला पाठ्यक्रम बताने के दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।



