
Uttarakhand SIR | Final Voter List | Election Update : उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शनिवार 3 अक्टूबर 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी गई। अंतिम सूची में प्रदेश के कुल 71 लाख 58 हजार 949 मतदाता शामिल हैं।
SIR शुरू होने से पहले प्रदेश में 79 लाख 60 हजार 762 मतदाता दर्ज थे। इस लिहाज से अंतिम सूची में SIR से पहले के मुकाबले 8 लाख 1 हजार 813 मतदाता कम हैं। हालांकि 14 जुलाई को जारी ड्राफ्ट सूची की तुलना में अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। ड्राफ्ट में 71 लाख 33 हजार 785 मतदाता थे…जबकि अंतिम सूची में यह संख्या बढ़कर 71 लाख 58 हजार 949 हो गई।
अंतिम सूची में 37 लाख 37 हजार 701 पुरुष, 34 लाख 21 हजार 36 महिलाएं और 212 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। वहीं 18 से 19 वर्ष की उम्र के 72 हजार 656 मतदाता और 80 वर्ष से अधिक उम्र के 1 लाख 22 हजार 892 मतदाता भी सूची में दर्ज हैं। प्रदेश में इस समय कुल 12 हजार 543 मतदेय स्थल हैं।
उत्तराखंड में SIR की शुरुआत 8 जून 2026 को हुई थी। भारत निर्वाचन आयोग ने 1 जुलाई 2026 को अर्हता तिथि मानकर यह प्रक्रिया कराई। इस दौरान BLO यानी बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं से एन्यूमरेशन फॉर्म भरवाए और पुराने मतदाता रिकॉर्ड का सत्यापन किया।
SIR शुरू होने के समय प्रदेश में 79 लाख 60 हजार 762 मतदाता थे। गणना फॉर्म के वितरण और संकलन के बाद 14 जुलाई को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई। इसमें मतदाताओं की संख्या घटकर 71 लाख 33 हजार 785 रह गई।
ड्राफ्ट सूची में 37 लाख 23 हजार 614 पुरुष, 34 लाख 9 हजार 954 महिलाएं और 217 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल थे।
ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया गया। इसके बाद 13 अगस्त से 28 सितंबर तक दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया चली।
पहले अंतिम मतदाता सूची 15 सितंबर को प्रकाशित होनी थी। बाद में दावे-आपत्तियों और संबंधित सत्यापन प्रक्रिया के लिए समय बढ़ाया गया और अंतिम सूची 3 अक्टूबर को प्रकाशित की गई।
SIR के दौरान 8 जून से 13 जुलाई तक 8 लाख 26 हजार 977 ऐसे मतदाता सामने आए…जो मौके पर नहीं मिले, दूसरे स्थान पर चले गए थे एक से ज्यादा जगह दर्ज थे या उनकी मृत्यु हो चुकी थी। इन मतदाताओं को ASDD कैटेगरी में रखा गया।
ASDD का मतलब Absent, Shifted, Dead/Deceased और Duplicate है।
इन 8 लाख 26 हजार 977 मतदाताओं में से दावे और आपत्तियों के बाद 25 हजार 164 मतदाताओं के आवेदन स्वीकार किए गए। इसके बाद अंतिम सूची में 8 लाख 1 हजार 813 मतदाता ASDD कैटेगरी में रह गए।
इन नामों की स्थिति को समझना जरूरी है। ASDD कैटेगरी में रखे गए मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हैं। अगर इनमें कोई व्यक्ति पात्र है और वह मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराना चाहता है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकता है।
फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद ऐसे पात्र लोगों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। 10 अक्टूबर से अभियान शुरू करने की जानकारी दी गई है।
इस दौरान अलग-अलग जगह कैंप लगाए जाएंगे और पात्र लोगों से मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन लिए जाएंगे।
SIR के दौरान नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए Form-6 के जरिए आवेदन लिए गए। कुल 1 लाख 46 हजार 511 आवेदन मिले। इनमें से 1 लाख 29 हजार 872 आवेदन स्वीकार किए गए…जबकि 16 हजार 639 आवेदन निरस्त किए गए।
यानी अंतिम मतदाता सूची में 1 लाख 29 हजार 872 नए मतदाताओं को शामिल किया गया है।
Form-7 के जरिए 96 हजार 704 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 89 हजार 182 आवेदन निरस्त किए गए और 7 हजार 522 आवेदन स्वीकार किए गए। यानी Form-7 के आधार पर 7 हजार 522 मतदाताओं के नाम हटाए गए।
इसके अलावा नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया में इन-एलिजिबल पाए गए मामलों के आधार पर भी नाम हटाए गए। अंतिम सूची में कुल 1 लाख 4 हजार 708 नाम नियमानुसार विलोपित किए गए हैं।
SIR से पहले और अब का पूरा गणित
SIR से पहले प्रदेश में 79 लाख 60 हजार 762 मतदाता थे।
14 जुलाई को जारी ड्राफ्ट सूची में 71 लाख 33 हजार 785 मतदाता रह गए।
ड्राफ्ट के दौरान 8 लाख 26 हजार 977 मतदाता ASDD कैटेगरी में आए।
इनमें से दावे-आपत्तियों के बाद 25 हजार 164 मतदाताओं को अंतिम सूची में जगह मिली।
इसके बाद अंतिम सूची में 71 लाख 58 हजार 949 मतदाता दर्ज हुए।
इस पूरी प्रक्रिया में SIR से पहले की मतदाता संख्या की तुलना में 9 लाख 31 हजार 685 नाम हटाए गए….जबकि 1 लाख 29 हजार 872 नए मतदाता जोड़े गए। अंतिम सूची में ड्राफ्ट की तुलना में 1 लाख 4 हजार 708 नामों का विलोपन हुआ।
SIR के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट तैयार करते समय करीब 19 लाख रिकॉर्ड में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी पाई गई थी। इसका मतलब था कि सॉफ्टवेयर में मतदाता से जुड़ी कुछ जानकारियां आपस में मेल नहीं खा रही थीं।
इनमें नाम में अंतर, उम्र में असामान्य अंतर और परिवार के सदस्यों की उम्र से जुड़े अंतर जैसे मामले शामिल थे। किसी रिकॉर्ड में ऐसी विसंगति मिलने का मतलब यह नहीं था कि संबंधित मतदाता को सीधे अपात्र घोषित कर दिया गया।
ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता को नोटिस देकर अपनी जानकारी और पात्रता से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने का मौका दिया गया।
SIR के दौरान करीब 24 लाख 30 हजार मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए। इनमें लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले मामले और ऐसे रिकॉर्ड शामिल थे…जिनकी प्री-SIR प्रक्रिया में मैपिंग नहीं हो पाई थी।
नोटिस के बाद मतदाताओं को अपनी पात्रता से जुड़े दस्तावेज और जरूरी जानकारी देने का अवसर मिला।
जिन मामलों में जवाब नहीं मिला, जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए या मतदाता अथवा परिवार की ओर से कोई व्यक्ति सुनवाई में शामिल नहीं हुआ उनमें ERO-AERO ने आगे की प्रक्रिया पूरी की।
7 सितंबर तक 24 लाख 30 हजार 387 नोटिस में से 24 लाख 29 हजार 524 मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी थी। इसके बाद दावे और आपत्तियों के निस्तारण का काम भी जारी रहा।
SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए करीब 1.73 लाख Form-7 आवेदन मिलने की जानकारी सामने आई। इनमें 95 हजार से ज्यादा मामलों में मतदाताओं को इन-एलिजिबल मार्क किया गया था।
इन मामलों में पहले रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों की प्रक्रिया पूरी की गई थी। जब संबंधित मतदाता जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाए या सुनवाई में खुद अथवा परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ….तो ERO-AERO ने ECI-Net पर संबंधित मामले को ‘इन-एलिजिबल’ मार्क किया।
इसके बाद सिस्टम से Form-7 ऑटो जनरेट हुआ और नाम हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
यहां यह समझना जरूरी है कि 95 हजार से ज्यादा इन-एलिजिबल मामलों की संख्या अंतिम रूप से हटाए गए नामों की संख्या नहीं थी। फाइनल वोटर लिस्ट में कुल 1 लाख 4 हजार 708 नाम नियमानुसार हटाए गए हैं।
ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद 14 जुलाई से 13 अगस्त तक दावे और आपत्तियां दर्ज की गईं।
इस दौरान Form-6, Form-7 और Form-8 के कुल 3 लाख 19 हजार 309 आवेदन मिले।
इनमें Form-6 के 1 लाख 37 हजार 146 आवेदन, Form-7 के 1 लाख 30 हजार 382 आवेदन और Form-8 के 51 हजार 781 आवेदन शामिल थे।
Form-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नया नाम जोड़ने के लिए, Form-7 का इस्तेमाल नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज करने के लिए और Form-8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज जानकारी में सुधार के लिए किया जाता है।
दावे और आपत्तियों के निस्तारण के कारण अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख आगे बढ़ाई गई। पहले अंतिम सूची 15 सितंबर को जारी होनी थी…लेकिन बाद में समय बढ़ाकर 28 सितंबर तक प्रक्रिया पूरी करने का कार्यक्रम बनाया गया और अंतिम प्रकाशन 3 अक्टूबर को किया गया।
गढ़वाल मंडल की बात करें तो उत्तरकाशी में 2 लाख 25 हजार 50 मतदाता हैं। इनमें 1 लाख 17 हजार 314 पुरुष, 1 लाख 7 हजार 734 महिलाएं और 2 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
चमोली में कुल 2 लाख 76 हजार 7 मतदाता हैं। इनमें 1 लाख 41 हजार 891 पुरुष, 1 लाख 34 हजार 115 महिलाएं और 1 थर्ड जेंडर मतदाता है।
रुद्रप्रयाग में कुल 1 लाख 82 हजार 436 मतदाता हैं। इनमें 92 हजार 134 पुरुष और 90 हजार 302 महिला मतदाता हैं।
टिहरी गढ़वाल में 4 लाख 66 हजार 638 मतदाता हैं। इनमें 2 लाख 43 हजार 51 पुरुष, 2 लाख 23 हजार 583 महिलाएं और 4 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
देहरादून में कुल 11 लाख 94 हजार 797 मतदाता हैं। इनमें 6 लाख 17 हजार 41 पुरुष, 5 लाख 77 हजार 706 महिलाएं और 50 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।
हरिद्वार में 12 लाख 45 हजार 458 मतदाता हैं। इनमें 6 लाख 65 हजार 203 पुरुष, 5 लाख 80 हजार 154 महिलाएं और 101 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।
पौड़ी गढ़वाल में कुल 5 लाख 7 हजार 135 मतदाता हैं। इनमें 2 लाख 64 हजार 235 पुरुष, 2 लाख 42 हजार 890 महिलाएं और 10 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।
कुमाऊं मंडल की स्थिति
पिथौरागढ़ में कुल 3 लाख 43 हजार 638 मतदाता हैं। इनमें 1 लाख 75 हजार 865 पुरुष, 1 लाख 67 हजार 771 महिलाएं और 2 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
बागेश्वर में कुल 2 लाख 5 हजार 689 मतदाता हैं। इनमें 1 लाख 5 हजार 817 पुरुष और 99 हजार 872 महिला मतदाता हैं।
अल्मोड़ा में कुल 4 लाख 76 हजार 536 मतदाता हैं। इनमें 2 लाख 48 हजार 865 पुरुष, 2 लाख 27 हजार 667 महिलाएं और 4 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
चंपावत में कुल 1 लाख 90 हजार 988 मतदाता हैं। इनमें 1 लाख 802 पुरुष, 90 हजार 185 महिलाएं और 1 थर्ड जेंडर मतदाता है।
नैनीताल में कुल 6 लाख 97 हजार 547 मतदाता हैं। इनमें 3 लाख 63 हजार 95 पुरुष, 3 लाख 34 हजार 440 महिलाएं और 12 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
ऊधम सिंह नगर में कुल 11 लाख 47 हजार 30 मतदाता हैं। इनमें 6 लाख 2 हजार 388 पुरुष, 5 लाख 44 हजार 617 महिलाएं और 25 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
SIR के दौरान 95 हजार से ज्यादा मतदाताओं को ‘इन-एलिजिबल’ मार्क किए जाने के बाद कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस ने Form-7 के इस्तेमाल और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर आपत्तियां जताईं।
वहीं निर्वाचन कार्यालय की ओर से कहा गया कि नाम हटाने की प्रक्रिया तय नियमों के तहत नोटिस, जवाब, दस्तावेज और सुनवाई के बाद आगे बढ़ाई गई। कार्यालय के मुताबिक जिन मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत जरूरी दस्तावेज नहीं मिले या सुनवाई में कोई उपस्थित नहीं हुआ उन्हें ECI-Net पर ‘इन-एलिजिबल’ मार्क किया गया।
अगर किसी पात्र व्यक्ति का नाम अंतिम मतदाता सूची में नहीं है तो वह Form-6 के जरिए नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। आवेदन के साथ निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित दस्तावेज भी देने होंगे।
फाइनल रोल के बाद पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। BLO घर-घर जाकर ऐसे लोगों की पहचान करेंगे…जिनके नाम प्री-SIR सूची में थे लेकिन वर्तमान सूची में नहीं हैं।
योग्य पाए जाने वाले लोगों से Form-6 भरवाने में BLO मदद करेंगे। पहली बार मतदान करने वाले युवाओं और छूटे हुए मतदाताओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके साथ ही बेघर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे। नाइट शेल्टर और लेबर कॉलोनियों में भी कैंप आयोजित किए जाएंगे।
BLO की ओर से तैयार सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ साझा की जाएगी। इसके बाद ERO बूथवार सूची राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी उपलब्ध कराएंगे…ताकि छूटे हुए पात्र मतदाताओं को नाम जुड़वाने का एक और मौका मिल सके।
ऐसे चेक करें अपना नाम
अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम देखने के लिए भारत निर्वाचन आयोग के Voters Service Portal पर जाकर मतदाता विवरण चेक किया जा सकता है। CEO Uttarakhand की वेबसाइट पर भी SIR-2026 से जुड़ी सामग्री, ड्राफ्ट रोल और मतदाता सेवाएं उपलब्ध हैं।
इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारी यानी DEO, Electoral Registration Officer यानी ERO कार्यालय और अपने BLO से भी मतदाता सूची की जानकारी ली जा सकती है।
अगर नाम सूची में नहीं है और व्यक्ति पात्र है…तो Form-6 के जरिए नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है।




