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बल्ला उठाकर पुरानी सोच को पहुंचाया बाउंड्री पार, पौड़ी के गांव की महिलाएं रच रही हैं इतिहास

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Women cricket tournament, Village women participation:- उत्तराखंड राज्य में आपने महिलाओं को लकड़ी और चारा इकट्ठा करने के लिए मीलों दूर पैदल जाते देखा होगा। पर उत्तराखंड के एक जिले में महिलाओं के शौक और हौसले ने ये नजारा ही बदल दिया है। उत्तराखंड के पौड़ी जिले के बिरोखाल ब्लॉक के फरसानी में महिलाएं अब घर के कामकाज के लिए नहीं बल्कि अब वह क्रिकेट खेलने और देखने के लिए पैदल जाती नजर आती हैं।

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कुंजेश्वर महादेव समिति की मेजबानी ने बदला दृश्य

दरअसल इस क्षेत्र में पिछले 6 साल से कुंजेश्वर महादेव समिति पुरुषों के लिए एक क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित करती आ रही थी। लेकिन गांव में नौकरी और सुविधाओं की कमी के कारण बड़ी मात्रा में पुरुष गांव से शहरों को पलायन कर चुके हैं। ऐसे में इस साल टीमों को संभालने के लिए टूर्नामेंट में पर्याप्त पुरुष नहीं थे। तब केएमएस ने महिला क्रिकेट टूर्नामेंट की मेजबानी करने का फैसला लिया।

ग्रामीणों की शानदार प्रतिक्रिया से मिला हौसला

केएमएस के पदाधिकारी मुकेश रावत बताते हैं कि इस फैसले को ले कर लोगों की प्रतिक्रिया जबरदस्त थी। क्रिकेट टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए कुल 45 टीमों ने आवेदन किया था, जिनमें से 32 को चुना गया था। विजेता और उपविजेता के लिए केएमएस की पुरस्कार राशि 3,000 रुपये और 1,500 रुपये निर्धारित की गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए 3.5 लाख रुपये तक के नकद पुरस्कार की घोषणा की है।

7 जनवरी से शुरू हुई प्रतियोगिताएं,नियमों में हुआ फेर बदल

रावत बताते हैं कि स्पर्धा में भाग लेने वाली महिला खिलाड़ियों की उम्र 14 से 50 साल के बीच है। इनमें से अधिकांश महिलाओं ने पहले कभी भी क्रिकेट नहीं खेला है। इसके बावजूद भी महिलाओं में उत्साह भरपूर देखने को नजर आ रहा है। यह टूर्नामेंट 7 जनवरी से शुरू किया जा चुका है और फाइनल इस महीने के अंत में तय हुआ है। टीमें 5-ओवर का गेम टेनिस बॉल से खेल रही हैं।इस के अलावा क्रिकेट नियमों में कुछ बदलाव भी किये गये। क्योंकि अधिकांश खिलाड़ियों ने कभी बल्ला या गेंद नहीं पकड़ी थी, इसलिए एलबीडब्ल्यू, लेग बाई और बाई जैसे नियम हटा दिए गए हैं। लेकिन ‘नो बॉल’ और ‘वाइड बॉल’ को लागू किया जा रहा है।

दर्शकों में भी महिलाएं की बड़ी संख्या मौजूद है। तिमली, नैनस्यूं, बैनरो, पुंजोली और गुरीदशीलथला जैसे कई दूरदराज के गांवों से भी महिलाएं टूर्नामेंट में खेलने व मैच देखने आई हैं।

नए हुनर और खिलाड़ियों की हो सकेगी पहचान

उत्तराखंड महिला क्रिकेट अंडर-19 टीम की कप्तान कनक टूपरनिया ने इस मामले में अपना बयान देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन का सबसे बड़ा श्रेय उन लोगों को जाता है जो पुरातन सोच को छोड़ कर आगे आए। इस पहल के कारण महिलाओं को अपने घरों से बाहर निकलने में मदद मिली है। यह टूर्नामेंट उन पहाड़ी महिलाओं के लिए एक बड़ा ब्रेक है, जिनका जीवन कठिन है और उनके पास खुद के लिए बहुत कम समय है। उन्होंने आगे बोला कि इस तरह की पहल से देश के लिए नए खिलाड़ी ढूंढने में मदद मिल सकती है।

मैच खेलने और देखने वाली हर महिला है विजेता

अपने गांव की टीम का प्रतिनिधित्व करने वाली, पुंजोली निवासी करिश्मा देवी, कहती हैं कि क्रिकेट ने ना केवल उन्हें अपने घरों और थका देने वाली दिनचर्या से बाहर निकाला है, बल्कि इससे उन्हें खराब सड़क कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों को उठाने का भी मौका मिला है। टूर्नामेंट केवल एक ही टीम जीतेगी, लेकिन पौड़ी की हर महिला, जो खेल रही है या ये मैच देख रही है, वो पहले ही जीत चुकी है।

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