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उत्तराखंड महिला मंच की मांग: महिलाएं को मिलना चाहिए 33प्रतिशत आरक्षण

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हल्द्वानी: भारत में राजनीति को फलने फूलने के लिए महिला मुद्दों और  महिलाओं के समर्थन की तो बराबर दरकार रहती है ।परन्तु  राजनीति में  आने वाली लगभग 90 प्रतिशत महिलाओं को अपने अपमान के साथ ही कई टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। देश में लोकसभा चुनाव हों या विधानसभा चुनाव छोटे-बढ़े हर चुनाव पर अक्सर महिला प्रत्याशियों के चरित्र पर छींटाकशी दिखना आम हो गया है। फिर चाहे वो कांग्रेस की वरिष्ठ सोनिया गाँधी हो या हाल ही में बीजेपी में आयी जयाप्रदा या प्रियंका गाँधी वाड्रा, राजनीतिक दलों की महिला प्रत्याशियों के खिलाफ ऐसी आलोचनाओं का प्रयोग ,सोशल मीडिया में फैलाए जा रहे कमेंट्स आदि के खिलाफ अब महिलाएं  विरोध पर उतर आयी हैं।इस बात पर उत्तराखंड में भी महिला प्रतिनीधियों का गुस्सा भी अब साफ झलकने तगा है।

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महिलाओं की ऐसी अपमानजनक स्थिति के विरोध में उत्तराखंड महिला मंच सड़क पर उतर आया है।उनके अनुसार राजनीति में महिलाएं भी बराबर सम्मान की हकदार हैं।  पर ऐसी अपमानजनक बातें महिला नेता को आगे बढ़ने से रोकती हैं। उन्हे अपेक्षित समर्थन नहीं मिलता और महिला नेता द्वारा लाये जाने वाले जरूरी मुद्दे ज्यों के त्यों रह जाते हैं । मंच ने राजनीतिक दलों से महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण देने की बात कही और खेती किसानी कर रही महिलाओं को किसान का दर्जा प्रदान करने के पक्ष में आवाज बुलंद की ।

गुरुवार को महिला मंच से जुड़ी महिलाएं तल्लीलाल गांधी प्रतिमा के समक्ष एकत्र हुईं और वहाँ से मार्च निकाला । इस दौरान मंच की डॉ उमा भट्ट ,विमर्श संस्था की कंचन भंडारी आदि ने कहा कि देश में महिला अपराध बढ़ रहे हैं । दलित,अल्पसंख्यकों के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। महिलाओं को सिर्फ उपभोग की वस्तु समझा जा रहा है।

संविधान में समानता के अधिकार के बाद भी महिलाओं को बराबर भागीदारी नहीं दी जा रही है । शराब की वजह से महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं। इन सभी कारणों के चलते महिलाएं आज भी पूर्ण रूप से सशक्त नहीं महसूस कर पा रहीं हैं।आगे बढ़ तो रही हैं वे फिर भी पुरूष प्रधान समाज की सोच उनकी उन्नति के आड़े आ रही है।इसी लिए यह जरूरी है कि उन्हें विशेष रूप से आरक्षित स्थान दिया जाए । इस अवसर पर मौजूद सुनीता शाही ,हेमा कबड़वाल ,कौशल्या साह,चंपा उपाध्याय आदि ने इस बात का सर्मथन किया ।

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