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हार का कारण जानने के लिए भगवान के दर पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत

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देहरादून : कांग्रेस के लिए चारों ओर से निराशा का दौर जारी है ऐसे में उसके नेता भगवान का सहारा ले रहे हैं । इसी कड़ी में हार का कारण जानने के लिए भगवान के दर पर जाने की घोषणा करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने  नेशविला रोड स्थित वाल्मीकि मंदिर में कीर्तन में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने व समर्थकों ने स्थानीय महिला सरिता वाल्मीकि के घर पर भोजन किया। आज शाम को वह टपकेश्वर महादेव मंदिर में भजन-कीर्तन करेंगे ।

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अखिल भारतीय अनुसूचित जाति युवजन सभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हरीश रावत ने कहा कि वह अगले कुछ महीनों तक लगातार मंदिरों में जाकर भजन-कीर्तन करेंगे और जनता से लोकसभा और विधानसभा चुनाव में हार का कारण भी जानेंगे। साथ ही जनता के बीच जाकर नरेंद्र मोदी मॉडल पर भी चर्चा करेंगे। भोजन के दौरान उन्होंने लोगों को मुख्यमंत्री रहते हुए मलिन बस्तियों के नियमितीकरण के साथ अन्य कार्यों के बारे में बताया। मीडिया से औपचारिक बातचीत में रावत ने कहा कि सीबीआइ का बोफोर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट जाना कारगिल के शहीदों का अपमान है। कारगिल की जीत में बोफोर्स तोप का बड़ा योगदान था।

कांग्रेस में गुटबाजी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हम सभी एक परिवार के बेटे हैं। सभी अलग-अलग कमा और खा रहे हैं। जब सभी बेटे कमाते हैं तो इससे परिवार और मजबूत होता है। दून व हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली में शामिल नहीं होने पर सोशल मीडिया में चल रही तकरार पर कहा कि यह बहस चटखारे लेने के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे अगले चुनाव तक पार्टी को मजबूत करने की मंशा है। एक स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता ने हरीश रावत के समक्ष यह सवाल भी दागा कि जब आप मुख्यमंत्री थे, तब कभी आप यहां नहीं आए। हरीश रावत ने कहा कि ‘मैं हमेशा आप सभी के बीच रहा हूं, लेकिन आपकी शिकायत को गलत नहीं कहूंगा’।
पूर्व सीएम हरीश रावत ने मंत्री-विधायकों की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने के मामले में कहा कि मंत्री ब्योरा दें या न दें, लेकिन वह अपनी संपत्ति अगले महीने तक सार्वजनिक कर देंगे।

 

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