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जय शाह का बड़ा खुलासा, ” इस तरीके से महेंद्र सिंह धोनी बने थे भारत के कप्तान “


MS Dhoni Captaincy Story : भारत के क्रिकेट इतिहास में जब भी कप्तानों की बात होगी तो उसमें सबसे अव्वल नंबर पर महेंद्र सिंह धोनी का नाम रहेगा। महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी कप्तानी में भारत को वो सब कुछ हासिल कराया जो बाकी कप्तान नहीं कर पाए थे। मगर एक चीज की चर्चा हमेशा रहती है की महेंद्र सिंह धोनी को कप्तानी कैसे और किन कारणों के चलते मिली थी।

इसी चीज का खुलासा बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने किया है। BCCI सचिव जय शाह ने कहा है कि सचिन तेंदुलकर ने कप्तानी के लिए धोनी का नाम सजेस्ट किया था। जय शाह ने यह बयान जागरण न्यूज को दिया है। आइए आपको वो पूरा घटनाक्रम समझाते हैं जिसके चलते भारतीय टीम की कमान महेंद्र सिंह धोनी को सौंपी गई थी।

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भारतीय क्रिकेट मैनेजमेंट सचिन को तीसरी बार भारत का कप्तान बनना चाहती थी, पर मास्टर ब्लास्टर माही के नाम पर अड़ गए थे। 2007 के इंग्लैंड दौरे पर सचिन तेंदुलकर ने महेंद्र सिंह धोनी का नाम कप्तानी के लिए रिकमेंड किया था। उस साल ODI विश्व कप के पहले ही दौर में टीम इंडिया बांग्लादेश के हाथों हारकर बाहर हो गई थी। भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद देश में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर भी टीम इंडिया का प्रदर्शन खराब रहा था। भारत को 7 एकदिवसीय मुकाबलों की सीरीज में 4-3 से शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इस हार के बाद से ही पूरे भारत में बवाल मचा हुआ था। उस वक्त भारत के कप्तान राहुल द्रविड़ थे और उन्हें हटाने की तैयारी कर ली गई थी। हालांकि बाद में उन्होंने खुद ही पद छोड़ दिया था।

राहुल द्रविड़ के पद छोड़ने के बाद अब नए कप्तान की तलाश शुरू हो गई थी। सचिन ने सबसे पहले साल 1996 में टीम इंडिया की कमान संभाली थी। वह दिसंबर 1997 तक कप्तान रहे। इसके बाद साल 1999 में सचिन को दोबारा कप्तानी करने का मौका मिला, लेकिन सचिन ने साल 2000 में टीम इंडिया की कप्तानी छोड़ दी थी। दरअसल जब भी टीम इंडिया का प्रदर्शन खराब होता था, सचिन को कप्तान बनाकर आलोचनाओं से बचने का प्रयास किया जाता था। वह भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा नाम थे। किसी भी क्रिकेट फैन को बतौर कैप्टन सचिन तेंदुलकर के नाम पर आपत्ति नहीं होती थी। ऐसे में BCCI ने फैंस की नाराजगी से बचने के लिए 2007 में भी सचिन से कप्तानी संभालने की रिक्वेस्ट की। इस पर सचिन ने जवाब दिया कि हमारे पास एक ऐसा लीडर है, जो अभी जूनियर है लेकिन उसे आपको करीब से देखना चाहिए।

सचिन ने बताया कि मैं फर्स्ट स्लिप में फील्डिंग करता था और इस दौरान मैंने मैच की सिचुएशन पर कई दफा महेंद्र सिंह धोनी से बातचीत की थी। हालांकि टीम के कप्तान राहुल द्रविड़ थे, लेकिन धोनी की राय अक्सर सटीक होती थी। सचिन ने कहा था कि 26 वर्षीय महेंद्र सिंह धोनी की प्रतिक्रिया शांत, संतुलित और परिपक्व होती थी। अच्छी कप्तानी हमेशा अपोजिशन टीम से एक कदम आगे रहने के बारे में है। अगर कोई ऐसा करने के लिए पर्याप्त तौर पर स्मार्ट है, तो फिर हमें उसे मौका जरूर देना चाहिए। जैसा कि हम अक्सर कहते हैं, जोश से नहीं बल्कि होश से खेलो। सचिन जानते थे कि आपको कभी लगातार 10 गेंद पर 10 विकेट नहीं मिल सकते। इसके लिए आपको पूरी तैयारी के साथ योजना बनानी होगी, तभी सफलता मिलेगी।

सचिन की तरह धोनी भी मानते थे कि दिन के अंत में किसी और चीज से ज्यादा स्कोरबोर्ड मायने रखता है। अगर प्रोसेस सही होगा, तो रिजल्ट जरूर अनुकूल आएगा। सचिन ने कहा कि मैंने ये सारे गुण महेंद्र सिंह धोनी के भीतर देखे थे। धोनी विकेट के पीछे खड़े होकर पूरा गेम चला सकते थे। सचिन ने बताया कि इसलिए मैंने BCCI और चयनकर्ताओं से बतौर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नाम की सिफारिश की थी। सचिन ने खुद कप्तान बनने की बजाय देश हित में धोनी को यह जिम्मेदारी सौंप दी। उस वक्त लोगों ने धोनी का विरोध किया, लेकिन सचिन अड़े रहे।

सचिन ने साफ कर दिया कि मैं तीसरी दफा टीम इंडिया की कप्तानी नहीं संभालूंगा। बाद में महेंद्र सिंह धोनी सचिन के भरोसे पर पूरी तरह खरे उतरे और T-20 वर्ल्ड कप, ODI वर्ल्ड कप और ICC चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाले दुनिया के इकलौते कप्तान बन गए। सचिन का वह डिसीजन भारत हित के लिए इतना अच्छा साबित हुआ इसमें कोई दो राय नहीं है। आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं कि आप सचिन के लिए उस फैसले से कितना सहमत है।

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