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सियाचिन में शहीद हुए विपिन सिंह का शव पहुंचा धारकोट गांव,बेटे को तिरंगे में लिपटा देख टूट गई मां


सियाचिन में शहीद हुए विपिन सिंह का शव पहुंचा धारकोट गांव,बेटे को तिरंगे में लिपटा देख टूट गई मां
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पौड़ी: प्रदेश को ऐसे ही शहीदों की भूमि नहीं कहा जाता। देवभूमि के बेटे हमेशा भारत माता की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। राज्य के लाल ना दुश्मन की गोली से डरते हैं और ना ही किसी भी तरह की विषम परीस्थितियों से। देवभूमि का एक और लाल विपिन सिंह सियाचिन में शहीद हो गया। शहीद जवान का शव आज उसके गांव धारकोट पहुंचा तो मां की हालत देख हर किसी के आंसु छलक पड़े।

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57 बंगला इंजीनियरिंग के विपिन सिंह इन दिनों सियाचिन में तैनात थे। 24 वर्षीय विपिन चार साल पहले ही सेना में भर्ती हुए थे। बीते जिनों जब वह ड्यूटी कर रहे थे तो उनका पैर फिसल गया। जिस वजह से वह ग्लेशियर की चपेट में आ गए और शहीद हो गए थे। इसके बाद विपिन सिंह के परिजनों को सैन्य अधिकारियों ने फोन कर घटना की जानकारी दी थी।

बहरहाल मंगलवार को पाबौ विकासखंड के धारकोट निवासी विपिन सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। इस दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी ने गांव पहुंचकर शहीद को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर विपिन के परिवार जनों का रो-रो कर बुरा हाल था। मां तो पूरी तरह से टूट चुकी हैं।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने परिजनों को शांत कराने की कोशिश की तथा उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि शहीद के परिवार की हर तरह से मदद की जाएगी। साथ ही ये भी कहा कि शहीद विपिन सिंह एक परिवार का ही नहीं बल्कि देश का बेटा है। सीएम धामी ने शहीद के सम्मान में कुछ बड़ी घोषणाएं भी की हैं। उन्होंने ऐलान किया कि शहीद के गांव को जाने वाली सड़क का नाम और इंटर कॉलेज का नाम शहीद विपिन सिंह के नाम पर रखा जाएगा।

बता दें कि शहीद के माता और पिता गांव में रहते हैं। बेटे को सेना में जाने की प्रेरणा भी पिता से मिली थी। बता दें कि शहीद के पिता भी सेना से रिटायर्ड है। बड़ा भाई भी सेना में है और बड़े भाई का परिवार कोटद्वार में रहता है। जानकारी के अनुसार विपिन सिंह मार्च में छुट्टी पर आए थे। इसके बाद वह गए तो किसी ने सोचा नहीं था कि अब बेटा तिरंगे में लिपट कर वापिस घर आएगा।

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