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जम्मू-कश्मीर में टूट गया भाजपा और पीडीपी का गठबंधन, लगा राज्यपाल शासन

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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर भाजपा और महबूबा मुफ्ती सरकार अब अलग हो गए है। ये फैसला भाजपा की तरफ से मंगलवार को सामने आया। साल 2015 में बने इस गठबंधन, को तोड़ने के पीछे भाजपा ने राज्य के बिगड़ते माहौल का कारण बताया। उन्होंने राज्य में राज्य में राज्यपाल शासन की मांग की है। इसके अलावा ने महबूबा सरकार पर सख्ती से कार्रवाई ना करने का भी आरोप लगाया।

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इस गठबंधन के टूटने के बाद महबूबा मुफ्ती ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया है। इससे पहले भाजपा के मंत्रियों ने अपना इस्तीफा मुफ्ती को सौंपा।भाजपा नेता राम माधव ने प्रेस कॉन्फ्रैंस में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह साथ राय के बाद ही गठबंध खत्म करने का फैसला लिया गया है। माधव ने कहा कि महबूबा मुफ्ती ने भाजपा का साथ नहीं दिया घाटी व लद्दाख में विकास में बाधा भी डाली।  मुफ्ती ने मंत्रियों को भी कामकाज नहीं करने दिया। हम पीडीपी के साथ घाटी में शांति बनाने के लिए खड़े हुए थे लेकिन वो उसमें नाकाम रहे।। माधव ने कहा कि महबूबा के तीन साल के कार्यकाल पर चर्चा हुई और सबकी राय के बाद गठबंधन तोड़ने का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि रमजान के दौरान आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन को लेकर भी मतभेद थे।

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बता दें इससे पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के मसले पर राज्य के नेताओं की बड़ी बैठक बुलाई थी। शाह ने जम्मू-कश्मीर सरकार में शामिल पार्टी के सभी मंत्रियों और कुछ शीर्ष नेताओं को इस बैठक में बुलाया था। वहीं बैठक से पहले जम्मू-कश्मीर के हालात को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने आज सुबह शाह से मुलाकात की और वहां के हालात की जानकारी दी। इस मुलाकात के बाद दोपहर को भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूट गया।भाजपा ने राज्य में राज्यपाल शासन लगाने की मांग की है। राम माधव ने कहा कि उम्मीद है कि राज्यपाल शासन से हालत सुधरेंगे। माधव ने कहा कि राज्यपाल शासन के बावजूद आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का ऑपरेशन ऑल आउट जारी रहेगा।

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