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ज्ञानवापी मामले में ASI ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश की,अयोध्या के बाद हो रही है काशी-मथुरा चर्चा

Varanasi High court: Giyanwapi Case: जैसा की आप सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय वाराणसी के दौरे पर हैं। ज्ञानवापी मस्जिद केस में आज वाराणसी की जिला अदालत में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने सर्वे रिपोर्ट पेश कर दी है। रिपोर्ट को सफेद रंग के सीलबंद लिफाफे में पेश किया गया है। इससे पहले मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में याचिका देते हुए मांग की थी कि रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाए। जानकारी के मुताबिक 21 दिसंबर को याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी के साथ ASI रिपोर्ट की कॉपी भी दी जाएगी।

ज्ञानवापी मंदिर पर कई सुनवाई, अड़चनों एवं हिन्दू पक्ष के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद ASI को इलाहबाद (प्रयागराज) हाई कोर्ट ने सर्वे करने की स्वीकृति दी थी। एक तरफ ज्ञानवापी मंदिर मामले पर हिन्दू पक्ष पूरा आश्वस्त नज़र आ रहा है तो मुस्लिन पक्ष इसे चुनाव से पहले खेले जाने वाला दांव बता रहा है। हिंदु पक्ष के लोगों का कहना है कि पर जब पूरा केस सबूतों और निष्पक्ष जांच पर आधारित हो चुका है तो यह कहना बिलकुल गलत नहीं होगा कि जिस तरह सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष होकर दोनों पक्षों कि दलीलें सुनकर राम मंदिर के भव्य निर्माण का निर्णय सुनाया था वैसे ही वाराणसी हाई कोर्ट भी इस मामले में अपना निष्पक्ष निर्णय सुनाएगा।


जहाँ एक तरफ ज्ञानवापी के निर्णय की प्रतीक्षा हो रही है तो वही दूसरी तरफ श्री कृष्ण जन्मभूमि मथुरा में भी आंदोलन ने तीव्र गति पकड़ ली है। दिसम्बर 2022 में सिविल जज सीनियर डिवीजन (थर्ड) सोनिका वर्मा ने एक आदेश में शाही ईदगाह मस्जिद का अमीनी सर्वे कराने का निर्देश दिया था। यह विवाद भी जमीनी अतिक्रमण का है जो कुल 13.37 एकड़ भू क्षेत्र का है जिसमे 11 एकड़ में श्री कृष्ण मंदिर तो 2.37 में अनधिकृत ईदगाह के निर्माण का मामला बताया जाता है।

इस मामले पर भी दुनिया भर के लोगों की नजर है। अब देखना यह है कि जब प्रधानमंत्री वाराणसी में हैं और कुछ ही दिनों बाद जब राम मंदिर का भव्य उद्घाटन होने जा रहा है तो क्या देशवासियों को नववर्ष पर कई खुशखबरी एक साथ मिलने वाली हैं या यह निर्णय भी वर्षों तक लंबित ही रहने वाला है।

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