National News

किसने बनाया नया अशोक स्तंभ… किस कंपनी को मिला था कांट्रेक्ट… जानें

Ad

नई दिल्ली: इन दिनों नई संसद की छत पर स्थापित अशोक स्तंभ की चर्चा पूरे देश में हो रही है। क्या आपकों पता है कि नई संसद की छत में स्थापित अशोक स्तंभ किसने बनाया है और किस कंपनी को इसका कांट्रेक्ट दिया गया था?

ADVERTISEMENTS Ad

किसने बनाया नई संसद की छत पर स्थापित अशोक स्तंभ

मूर्तिशिल्पी लक्ष्मण व्यास और सुनील देवड़े ने इस अशोक स्तंभ को बनाया है। उन्होंने इसे अशोक स्तंभ के भागों को दिल्ली, जयपुर और औरंगाबाद में अपने-अपने स्टूडियो में बनाया। इसके निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट टाटा ग्रुप को दिया था। नई संसद में स्थापित अशोक स्तंभ में शेरों के भाव बिल्कुल अलग दिख रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि नए संसद भवन की छत पर जो अशोक स्तंभ लगाया गया है, उसमें शेर आक्रामक दिखाई दे रहे हैं, जबकि सारनाथ में जो ओरिजिनल अशोक स्तंभ है, उसमें शेर शांत हैं। कांग्रेस का आरोप है कि ऐसा करके सरकार ने अशोक स्तंभ का अपमान किया है।

कौन हैं लक्ष्मण व्यास ( WHO IS LAXMAN VIYAS)

आपकों बता दें कि अशोक स्तंभ से पहले सुनील देवड़े और लक्ष्मण व्यास पहले भी कई महत्वपूर्ण प्रतिमाएं बना चुके हैं। हरियाणा के पलवल में लगी महाराणा प्रताप की विशाल धातु प्रतिमा को लक्ष्मण व्यास ने बनाया है। इसके अलावा उन्होंने इंदिरा गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम पर हाथियों की कुछ मूरतें बनाई हैं। लक्ष्मण व्यास ने अभी तक करीब 300 आदमकदम और धड़ प्रतिमाएं बनाई हैं। इसके अलावा बहुत से प्रतीकों की भी मूर्तियां बना चुके हैं।

जानिए कौन हैं सुनील देवड़े (Who Is Sunil Deore)

वहीं सुनील देवड़े ने अजंता-एलोरा की गुफाओं पर कई अतुल्नीय प्रतिमाओं का निर्माण किया है। उनके काम में महान सदाशिव साठे ने देश के महापुरुषों की अनेक प्रतिमाएं बनाईं। महात्मा गांधी की शहादत के करीब तीन वर्षों के बाद सरकार ने मुंबई के मूर्तिशिल्पी सदाशिवराव साठे को राष्ट्रपिता की एक आदमकद प्रतिमा को बनाने का जिम्मा सौंपा। इस मूरत को राजधानी के चांदनी चौक स्थित टाउन हॉल के बाहर स्थापित किया था। यह प्रतिमा 1952 में स्थापित हुई थी।मूर्तिकार सदाशिव साठे की झलक दिखती हैं। राष्ट्रीय प्रतिमा को बनाने वाले 49 वर्षीय मूर्तिकार सुनील देवड़े जेजे स्कूल ऑफ ऑर्ट्स से गोल्ड मेडल की उपाधि पा चुके हैं।

बता दें कि जयपुर के स्टूडियो शिल्पिक में चालीस कारीगरों को यह कृति बनाने में करीब पांच माह का समय लगा। इसको अलग-अलग हिस्सों में तैयार कर दिल्ली ले जाया गया। वहां इन हिस्सों को जोडक़र राष्ट्रीय प्रतीक की प्रतिकृति तैयार की गई। सोमवार को इसका अनावरण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया।

ADVERTISEMENTS Ad Ad
To Top