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उत्तराखंड में आजतक कोई भी मुख्यमंत्री नहीं हारा उपचुनाव, अब CM धामी के सामने चंपावत की चुनौती


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चंपावत: प्रदेश में विधानसभा चुनावों की गहमा गहमी शांत हुई तो अब फिर से चुनावों की बारी आ गई। चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए ये सीट छोड़ दी है। लाजमी है कि अब सीएम धामी ही यहां से उपचुनाव लड़ेंगे। उधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि खटीमा की ऐतिहासिक जीत को पार्टी चंपावत में भी दोहराएगी। वहीं, भाजपा इस बात से खुश होगी कि आजतक उत्तराखंड का कोई भी सीएम उपचुनाव में नहीं हारा है।

विधानसभा चुनाव 2022 में भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर विजेता बनकर निकली। भाजपा के खाते में 47 सीटें आईं तो कांग्रेस को 19 सीटों से संतोष करना पड़ा। हालांकि नतीजों में ट्विस्ट खटीमा से कांग्रेस के प्रत्याशी भुवन कापड़ी लेकर आए। जिन्होंने मुख्यमंत्री धामी को उनकी सीट से हरा दिया। लेकिन भाजपा ने सीएम धामी में एक प्रतिभाशाली नेता खोज लिया था इसलिए उन्होंने हारने के बाद भी धामी को ही सीएम बना दिया। अब उन्हें छह महीने के अंदर किसी ना किसी सीट से चुनाव लड़कर जीतकर विधायन बनना है।

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कई विधायकों ने सीएम धामी के लिए सीट छोड़ने की पेशकश की। अंत में खटीमा से सटे विधानसभा क्षेत्र चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी ने सीएम के लिए अपनी सीट छोड़ दी। इस तरह से अब सारी नजरें चंपावत पर हैं। चंपावत सीट जीतने के लिए भाजपा के साथ साथ कांग्रेस ने भी कमर कस ली है। कांग्रेस का दावा है कि सीएम ये सीट भी हार जाएंगे। भाजपाई कह रहे हैं कि ये सिर्फ कांग्रेस का भ्रम है। चंपावत का इतिहास बताता है कि वहां से अबतक तीन बार भाजपा और दो बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है।

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बता दें कि कांग्रेस के हिमेश खर्कवाल चंपावत सीट से दो बार चुनाव जीत चुके हैं। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में खर्कवाल 5,304 वोटों से हारे। खास बात ये है कि इस बार उनकी हार का अंतर पहले से कम हुआ है। कहना होगा कि सीएम धामी और भाजपा के लिए राह यूं तो इतनी आसान भी नहीं होने वाली है। हालांकि एक रिकॉर्ड उनके पक्ष में जाता है। वो ये कि आजतक उत्तराखंड के किसी मुख्यमंत्री को उपचुनाव में हार का मुंह नहीं देखना पड़ा है। चार बार ऐसी स्थिति आई है और चार बार ही मुख्यमंत्रियों ने जीत दर्ज की है।

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साल 2002 (नारायण दत्त तिवारी) – रामनगर से कांग्रेस विधायक बने योगंबर सिंह रावत ने उनके लिए सीट छोड़ दी तो मुख्यमंत्री रहते तिवारी ने यहीं से उपचुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

साल 2007 (बीसी खंडुरी) – कांग्रेस के टीपीएस रावत ने धुमाकोट सीट से इस्तीफा दिया और बीसी खंडुरी ने सीएम रहते हुए यहां से जीत हासिल की।

साल 2012 (विजय बहुगुणा) – सितारगंज से उपचुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। उनके लिए विधायक किरण मंडल ने सीट छोड़ दी थी।

साल 2014 (हरीश रावत) – धारचूला से कांग्रेस के विधायक हरीश धामी ने अपनी सीट छोड़ी। जिसपर हरीश रावत ने मुख्यमंत्री रहते हुए चुनाव लड़कर जीत हासिल की।

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