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उत्तराखंड में अधिकार की लड़ाई, अब कोर्ट ने सरकार को दिया चंद घंटों का समय


नैनीताल: राज्य के चर्चित वरिष्ठ आईएफएस राजीव भरतरी मामले में सोमवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई की और राज्य सरकार को सख्त निर्देश दे डाले। अधिकार की लड़ाई के इस मामले में एक बार फिर हाईकोर्ट ने राजीव भरतरी के पक्ष में निर्णय लिया। साथ ही राज्य सरकार को कोर्ट द्वारा चंद घंटों का समय दिया गया है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि भरतरी को मंगलवार सुबह दस बजे पीसीसीएफ (हॉफ)की कुर्सी पर दोबारा चार्ज दिया जाए।

गौरतलब है कि भरतरी को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्राइब्यूनल(कैट)से भी राहत मिल चुकी है। घड़ी की सुई को पीछे की तरफ ले चलें तो मामले की जड़ें समझ में आती हैं। दरअसल, उत्तराखंड सरकार ने 25 नवंबर 2021 को आईएफएस राजीव भरतरी का स्थानांतरण प्रमुख वन संरक्षक पद से अध्यक्ष जैव विविधता बोर्ड के पद पर कर दिया था। अब यह पद रिक्त हुआ तो उनके स्थान पर विनोद कुमार सिंघल को प्रमुख वन संरक्षक नियुक्त कर दिया गया था।

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आईएफएस अधिकारी राजीव भरतरी ने इस संबंध में चार प्रत्यावेदन दिए, लेकिन सरकार ने कोई भी सुनवाई नहीं की। अधिकारी का मानना था कि उनका ट्रांसफर राजनीतिक कारणों से हुआ है और सांविधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। इसके बाद कैट के न्यायाधीश ओम प्रकाश की एकलपीठ ने बीती 24 फरवरी को पीसीसीएफ पद से राजीव भरतरी को हटाने के आदेश को निरस्त भी कर दिया। लेकिन प्रदेश सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर कर दी।

सरकार का कहना था कि महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों की तैनाती या उनका ट्रांसफर करना सरकार का विशेषाधिकार है। इधर, कैट ने फिर से प्रमुख वन संरक्षक पद (हॉफ) पर राजीव भरतरी की नियुक्ति के अपने 24 फरवरी के आदेश को सही ठहराया है। इसके साथ ही सरकार के तर्क को ना मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। यह निर्देश भी दिए है कि भरतरी को जल्द नियुक्ती दी जाए।

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