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काठगोदाम में 40 साल पुरानी रेलवे लाइन पर चलेगी ट्रेन, गौला नदी ने पहुंचाया था नुकसान


Kathgodam Railway Station: Track Repairement Work: Indian Railways:

कुमाऊं के पहाड़ों का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले काठगोदाम से रेल यात्रा करने वाले सभी यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। गौला नदी के उफान से प्रभावित हुई रेल लाइन को बचाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। दरअसल 40 साल पुरानी इस रेल लाइन के बचाव का कार्य कार्यदायी संस्था ने तेजी से शुरू कर दिया है। काम की गति इतनी तेज है कि इस लाइन के बचाव का कार्य मानसून सीजन से पहले पूरा होने का दावा भी किया जा रहा है। अगर यह दावा सच साबित होता है तो मानसून से पहले काठगोदाम और हल्द्वानी के बीच इस लाइन पर एक बार फिर ट्रेनें दौड़ती नज़र आएंगी।

रेलवे ने स्वीकार की चुनौती

वर्ष 2022 में गौला में आए उफान और भू-कटाव को देखते हुए इस लाइन पर ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया था। खतरे और लाइन की हालत को देखते हुए उसके बाद इस ट्रैक पर कभी ट्रेनें नहीं चली। बता दें कि इस लाइन का निर्माण वर्ष 1984 यानी 40 साल पहले हुआ था। भू-कटाव का प्रभाव देखकर माना जा रहा था कि इस लाइन का बचाव करना आसान नहीं होगा। लेकिन रेलवे ने यह मुश्किल काम अपने हाथों में लिया और इसे पूरा करने के लिए बुलेट ट्रेन से भी तेज रफ़्तार के साथ काम शुरू कर दिया है।

तेजी से हो रहा कार्य

40 साल पुरानी लाइन नंबर 3 के बचाव कार्य के लिए हल्द्वानी तक प्रबंध कर दिए गए हैं। लाइन नंबर तीन पर गौला नदी की ओर ब्लॉक डालने के बाद भरान का कार्य शुरू हो चुका है। इसके लिए जगह-जगह पर बुलडोज़र का इस्तेमाल किया जा रहा है। बुलडोज़र की सहायता से अब तक आधी पटरी के भरान का कार्य पूरा हो चुका है। इसी के साथ काठगोदाम रेलवे स्टेशन से हल्द्वानी रेलवे स्टेशन तक गौला नदी में ब्लॉक डालने का कार्य भी हो रहा है। इस कार्य के बजट को लेकर अभी रेलवे अधिकारियों ने कोई जानकारी साझा नहीं की है। लेकिन लाइन का काम पूरा होते ही यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिलना और उन्हें होने वाली कई समस्याओं का समाधान होना तय है।

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