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उत्तराखंड के देवी-देवताओं के किस्से पढ़ेगी अगली पीढ़ी,कुमाऊं में बन रहा है पहला म्यूज़ियम

अल्मोड़ा: देवभूमि लोक कथाओं, लोक संस्कृति और लोक देवी-देवताओं का स्थान है। हालांकि कई लोक देवी-देवताओं को हम इतना बेहतर तरीके से पहचानते या जानते नहीं है। मगर अब आगे आनी वाली पीढ़ी इससे वंचित नहीं रहेगी। एक संग्रहालय में सारी कहानियों और देवी-देवताओं के ब्यौरे को संजो कर रखा जाएगा।

पुरातत्वविद पद्मश्री डा. यशोधर मठपाल के शोध के बाद सल्ट अल्मोड़ा के सल्ट ब्लॉक स्थित ऐतिहासिक मां मानिला देवी मंदिर शीक्तिपीठ में लोकदेवों के अनूठे संग्रहालय ने मूर्तरूप ले लिया है। यह तो सभी जानते हैं कि उत्तराखंड में लोक संस्कृति और देवी-देवताओं को कितना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कड़ी में अब नई पीढ़ी को लोक संस्कृति, परंपरा व लोकदेवों का ज्ञान देने के लिए मां मानिला मंदिर प्रबंधन कमेटी के प्रयासों से शक्तिपीठ में संग्रहालय तैयार किया गया है।

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बता दें कि यह प्रदेश का पहला ऐसा संग्रहालय बनेगा। साथ ही खास बात यह भी है कि यहां शोधार्थी शोध कार्यों को भी अंजाम दे सकेंगे। जानकारी के मुताबिक इसमें विशिष्ट पत्थरों पर उकेरी गई लोकदेवों की प्रतिमाएं स्थापित भी कर ली गई हैं। लिहाजा इस संग्रहालय को जितना हाथ उत्तराखंड वासियों और महानुभावों को रहा है। उतना ही साथ कुमाऊं के लोकदेवों की प्रतिमा बनाने में गांव के प्रवासियों ने भी दिया है।

बता दें कि इसमें दुबई, दिल्ली, देहरादून, आकाशपुर रामनगर व हल्द्वानीवासी शामिल हैं। वहीं कुणीधार बिष्ट बाखली, सैटनौला कुणीधार, सैकुड़ा, सैंणमानुर, खलटा, भिकियासैंण, मुनियाचौरा, नौहाई कबडोला मासी, नैल, रथखाल आदि गांवों के संस्कृति प्रेमियों ने भी अपनी अपनी ओर से प्रतिमाओं का निर्माण कराया है।

संग्रहालय में मुख्य रूप से न्याय देवता गोल्ज्यू महाराज, नृसिंग देवता, सैम देवता (सैमज्यू), श्री बधाण देवता, श्री कृष्ण गोपी (ग्वेल्देराणी), श्री बदरीनाथ, नगारझण (नागार्जुन) देवता, नागराज देवता , नवग्रह देवता, गायत्री माता, वडू सजेपाल देवता, महारानी जिया, धामद्यौ (धामदेव), ब्रह्मïद्यौ (ब्रह्मïदेव) व क्षेत्रपाल देवता की प्रतिमा लगेगी और साथ ही सभी के बारे में जानकारी और वीरगाथाओं को वर्णन किया जाएगा।

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