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देहरादून पहुंचा खटीमा का रण…अब सदन में होगा भुवन कापड़ी और सीएम धामी का आमना-सामना

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खटीमा, मंथन रस्तोगी: वर्तमान में प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी के गृह क्षेत्र खटीमा की कहानी राजनीति के लिहाज से बड़ी ही विचित्र होती जा रही है। खटीमा क्षेत्र तबसे खासी चर्चा में आया है जबसे पुष्कर सिंह धामी को सीएम बनाया गया है। एक समय वो था जब कुमाऊं के ऊधमसिंहनगर जनपद में स्थित खटीमा की चर्चा तक नहीं होती थी। वहीं, आज सीएम भी खटीमा के हैं और तो और उनपेता प्रतिपक्ष भी खटीमा से हैं। बीते दिन कांग्रेस द्वारा खटीमा से नवनिर्वाचित विधायक भुवन कापड़ी को उपनेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इस हिसाब से खटीमा का रण विधानसभा सदन में भी देखने को मिलने वाला है।

साल 2012 में पुष्कर सिंह धामी पहली बार खटीमा से चुनाव लड़कर विधायक बने थे। उन्होंने कांग्रेस के दवेंद्र चंद को हराया था। इसके बाद खटीमा के रण में कांग्रेस के भुवन कापड़ी ने कदम रखा और साल 2017 में इस सीट पर कांटे की टक्कर रही। हालांकि पुष्कर सिंह धामी 2709 वोटों के बारीक मार्जिन से जीत हासिल करने में कामयाब रहे। लेकिन इसी चुनाव से खटीमा में एक चुनावी घमासान का शुभारंभ हुआ। जिसे आज पूरा उत्तराखंड देख रहा है। साल 2021 के मध्य खटीमा के विधायक पुष्कर सिंह धामी को भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री बनाया गया।

लेकिन ये हर कोई जानता था कि धामी के लिए सीएम होते हुए भी खटीमा की सीट निकालना इतना आसान नहीं होगा। 10 मार्च वो तारीख थी जब कांग्रेस के प्रत्याशी और तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष भुवन कापड़ी ने इतिहास रच दिया। भुवन कापड़ी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को बड़े मार्जिन से हराकर ना सिर्फ अपनी पुरानी हार का बदला लिया बल्कि ये भी दिखाया के खटीमा में सिर्फ एक नहीं बल्कि दो-दो महारथी हैं। इस लड़ाई ने पूरे उत्तराखंड को खटीमा की ओर देखने पर मजबूर कर दिया।

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हालांकि सीएम धामी खटीमा से चुनाव हार गए मगर फिर भी भाजपा ने उनपर भरोसा जताया और सीएम की कुर्सी उन्हें सौंप दी। इधर, धामी को हराने वाले भुवन कापड़ी के कद को लेकर नतीजे आने के बाद से ही चर्चाएं चल रही थी। अब रविवार की शाम को कांग्रेस ने यशपाल आर्य को नेता प्रतिपक्ष बना दिया। जबकि खटीमा के विधायक भुवन कापड़ी को उपनेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें कोई दोराय नहीं कि पहली बार विधानसभा पहुंचे भुवन कापड़ी को उपनेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिलना उनके राजनैतिक कौशल और बढ़े हुए कद का परिचायक है।

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एक रण जो खटीमा से शुरू हुआ था। जिस रण ने खटीमा को आज पूरे उत्तराखंड में चर्चा का विषय बना दिया है। वही रण अब खटीमा से देहरादून तक का सफर कर चुका है। विधानसभा सदन में जहां मुख्यमंत्री भाजपा की कमान संभाले दिखेंगे तो वहीं डिप्टी लीडर के तौर पर कमान तो भुवन कापड़ी भी कांग्रेस की संभालेंगे। लाजमी है कि उत्तराखंड की राजनीति अब युवाओं के तरफ नजरें लगाकर बैठी है। तभी युवाओं को एक के बाद एक बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही हैं। बहरहाल देखना होगा कि सीएम धामी और भुवन कापड़ी में से इस पारी में बाजी कौन मारता है।

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