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कौन हैं मीराबाई चानू, जिन्होंने पहले ही कर दिया था टोक्यो ओलंपिक में अपनी जीत का दावा

कौन हैं मीराबाई चानू, जिन्होंने पहले ही कर दिया था टोक्यो ओलंपिक में अपनी जीत का दावा

नई दिल्ली: भारत की बेटी ने टोक्यो में इतिहास रच दिया है। वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने भारत को टोक्यो ओलंपिक में पहला पदक जिता दिया है। 49 किलोग्राम महिला वर्ग के वेटलिफ्टिंग इवेंट में सिल्वर पदक जीतकर मीराबाई चानू भारत की ओर से ओलंपिक में मेडल जीतने वाली केवल दूसरी महिला वेटलिफ्टर बन गई हैं। बता दें कि चीन की जजिहू को वेटलिफ्टिंग के 49 किलोग्राम इवेंट में गोल्ड मेडल मिला है.

इतिहास रचने वाली मीराबाई चानू का जीवन आसान नहीं रहा। यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने बहुत संघर्ष किया है। 8 अगस्त 1994 को इम्फाल में जन्मीं चानू साइखोम मीराबाई बचपन में तीरंदाजी की शौकीन रहीं। इसी में अपना करियर बनाने का शौक पाले मीराबाई चानू का झुकाव 8वीं कक्षा के बाद वेटलिफ्टिंग की ओर हो गया।

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इसके बाद उन्होंने इम्फाल की वेटलिफ्टर कुंजरानी को प्रेरणा मानकर वेटलिफ्टिंग में ही आगे बढ़ने का फैसला किया। महज 11 साल की उम्र में 26 वर्षीय चानू ने लोकल वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था। फिर तो जीत की ऐसी लत लगी कि विश्व और एशियाई जूनियर चैंपियनशिप प्रतिस्पर्धा में भाग लेकर चानू का अंतर्राष्ट्रीय करियर भी शुरू हो गया। उन्होंने दोनों प्रतिस्पर्धाओं में पदक जीते।

मणिपुर निवासी मीराबाई चानू ने अपने सपनों को पूरा करने के उन्हें काफी संघर्ष किया है। हालांकि परिवार हमेशा चानू की ढाल रहा मगर आर्थिक स्थिति ने कई बार मुसीबतें खड़ी कीं। लेकिन परिवार और चानू का खुद का संघर्ष ही है जो आज वह अपने परिवार और देश का नाम ऊंचा कर रही हैं।

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मीराबाई चानू ने देश को पहले भी साल 2014 ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर अलग पहचान बनाई। इसके बाद 2016 रियो ओलंपिक गेम्स के क्वालीफाई मैच में चानू ने अपनी प्रेरणा वेटलिफ्टर कुंजरानी को हराकर रियो ओलंपिक्स में अपनी जगह बनाई थी। इसके बाद मीराबाई ने 2017 में हुई वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 48 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल, 2018 में कॉमन वेल्थ गेम्स में भी चानू ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।

अप्रैल 2021 में ताशकंद में एशियाई वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के दौरान, मीराबाई चानू ने महिलाओं की 49 किग्रा क्लीन एंड जर्क में 119 किग्रा भार उठाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया था। दूसरी ओर चानू को स्नैच में खराब प्रदर्शन के कारण एशियाई मीट में कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था। लिहाजा टोक्यो ओलंपिक में भारत को पहला मेडल दिलाने में कामयाब रही चानू इस जीत का दावा कर के रवाना हुई थी।

बता दें कि मीराबाई चानू को अबतक काफी पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने चानू को सम्मानित किया और उन्हें 20 लाख रुपये का पुरस्कार दिया. उन्हें 2018 में भारत के सर्वोच्च नागरिक खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया था. चानू को 2018 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

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