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पिथौरागढ़ निवासी मुस्कान सोनाल बनीं फर्स्ट पायलट अफसर, पूरा उत्तराखंड कर रहा है गर्व


Muskan Sonal Pithoragarh: Pithoragarh Success Story: Darma Valley:

भारत की सीमाओं पर रहने वाले उत्तराखंडवासियों की योग्यता की सीमा हमेशा अनंत रही है। सुविधाओं की कमी के कारण यहाँ के लोग अफ़सोस नहीं करते। अफ़सोस की जगह प्रयासों और दोगुने परिश्रम से अपने सपने को पूरा करने का प्रयास करते हैं। बादलों के उप्पर पर्वतों के आलिंगन में रहने वाले हम उत्तराखंडवासियों के लिए ऊंचाई जीवन का एक सामान्य अंश है। ऊंचाई तो सामान्य है लेकिन ऊंचाई पर हवाई जहाज उड़ाती बेटियों की कल्पना इन क्षेत्रों में अभी भी उतनी सामान्य नहीं है। आज हम बात करेंगे मुस्कान सोनाल की जिन्होंने अपनी सफलता से सीमान्त क्षेत्र और पूरे प्रदेश के गौरव को आसमान की सैर कराई है।

जी हाँ, दारमा घाटी के सीमांत ग्राम सोन दुग्तू, निवासी मुस्कान सोनाल की एयर इंडिया ग्रुप से फर्स्ट पायलट ऑफिसर पद पर नियुक्ति हो गई है। मुस्कान की इस उपलब्धि से केवल उनके या उनके परिवार के ही नहीं बल्कि पूरे समाज और क्षेत्रवासियों के चेहरे पर भी मुस्कान खिल उठी है। बता दें कि मुस्कान रं समाज की पहली कॉमर्शियल महिला पायलट हैं। रं:- भारत, नेपाल तथा तिब्बत के बीच में रहने वाले जनजाति समुदाय है।

मुस्कान ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी रायबरेली से कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस का तीन साल का कोर्स किया है। मुस्कान इससे पहले प्राइवेट कंपनी के जहाज में तीन साल सेवा दे चुकी हैं। साथ ही बहरीन गल्फ से दो माह का पायलट कोर्स भी कर चुकी हैं। मुस्कान के पास 200 Hr(घंटे) उड़ान का अनुभव है। कोरोना काल में वो उड़ान अकादमी फुरसतगंज में प्रशिक्षक भी रह चुकी हैं। एयर इंडिया की परीक्षा में 1980 अभ्यर्थी उपस्थित हुए थे। इन सभी अभ्यर्थियों में से केवल 22 का ही चयन हुआ। चयनित 22 उम्मीदवारों में वो प्रथम स्थान पर चुनी गई हैं।

मुस्कान के पिता भूप सिंह सोनाल SBI में मुख्य प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं और माता बसंती सोनाल कुशल गृहणी हैं। अपनी बेटी की आसमान छूती सफलता पर मुस्कान के माता-पिता गौरवान्वित हैं। सभी क्षेत्रवासियों और परिचितों ने भी अपनी शुभकामनाएं मुस्कान और उनके परिवार को दी हैं। मुस्कान ने भी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और प्रशिक्षकों को दिया है। अपने बच्चों के सपनों का कद समझने और उन्हें उस ऊंचाई को प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने वाले ऐसे माता-पिता सदैव बधाई के पात्र रहेंगे।

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