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खटीमा सीट में कांग्रेस का टेंशन, गुटबाजी का निकालने पड़ेगा तोड़


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देहरादून:विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान हो गया है। उत्तराखंड में 14 फरवरी को मतदान होगा और 10 मार्च को नतीजे घोषित होंगे। पिछले बार भाजपा को 57 सीटे मिली थी और वह लगातार दूसरी बार सत्ता बनाने का प्लान बना रही है जो उत्तराखंड में कभी नहीं हुआ। वहीं एक बार फिर उत्तराखंड में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहती है। पिछले चुनावों में कांग्रेस को 11 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था और वहां से उठकर 36 सीट हासिल करना बिल्कुल भी आसान नहीं रहने वाला है। दोनों ही दलों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है और ऐसे में एक सीट से कई दावेदार सामने आ रहे हैं। टिकट बंटवारे के बाद असंतोष होना लाजमी है और उसे कंट्रोल करना राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ा चैलेंज होगा।

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इस बार खटीमा विधानसभा सीट पर सभी की नजरें हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी यहीं से विधायक हैं। पिछले चुनावों में विधायक धामी को केवल 2709 मतों से जीत मिली थी। उन्हें कांग्रेस के भुवन कापड़ी ने टक्कर दी खी और इसके बाद कापड़ी का कद भी कांग्रेस में बढ़ा है। पुष्कर सिंह धामी के सीएम बनने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि वह दूसरी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन कुछ दिन पूर्व ही सीएम ने खटीमा से चुनाव लड़ने की बात कही लेकिन अब कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी गुटबाजी सामने आ रही है।

किसान कांग्रेसी नेता प्रकाश तिवारी ने खटीमा से दावेदारी ठोकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रकाश तिवारी ने अपनी दावेदारी के लिए प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष भुवन कापड़ी पर भी निशाना साधने से नहीं चूके। उन्होंने कहा कि कापड़ी उन्हें चुनाव लड़ाएंगे और यह उनकी जिम्मेदारी है।प्रकाश तिवारी हरीश रावत के करीबी मानें जाते हैं। वहीं पिछले चुनावों में शानदार प्रदर्शन करने वाले भुवन कापड़ी टिकट को लेकर निश्चित हैं। उन्होंने कहा कि टिकट को लेकर संगठन तय करेगा कोई नेता नहीं…. भाजपा को सत्ता से हटाने का प्लान बना रही कांग्रेस के लिए चुनाव से पहले ये भीतरघात नुकसान पहुंचा सकता है। दोनों ही नेता खटीमा से चुनाव लड़ना चाहते हैं और इस मसले को कांग्रेस को प्रत्याशियों की घोषणा होने के बाद ही सुलझाना पड़ेगा।

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