Rajasthan

अब भी नहीं सुलझी कांग्रेस की आपसी कलह , फिर से गहलोत और पायलट के बीच तकरार !



राजस्थान : साल 2014 में गुजरात के मुख्यमंत्री दामोदार दास नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही , बीजेपी सरकार ने देश की बागडोर संभाल ली थी । उस दिन को बीजेपी समर्थकों के लिए ऐतिहासिक दिन मानकर कांग्रेस के 60 वर्षों के सत्ता पर शासन के दिन खत्म मान लिए गए । इस वक्त देश के अधिकतर राज्यों में भाजपा व एनडीए की ही सरकार है। राजस्थान उन राज्यों में जहां कांग्रेस की सरकार है और वह इससे भुनाने में लगी हुई है, लेकिन आपसी कलह कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है। यह सब जानते है कि कांग्रेस की आपसी कलह अभी तक ठीक नही हुई है । जब कभी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने चुनावी कार्यक्रम में जाते हैं तो वहां संयोग के लिए सचिन पायलट नजर नहीं आते और जहां सचिन पायलट का कार्यक्रम होता है तो वहां अशोक गहलोत नजर नहीं आते।

अभी बीते दिनों जरूर इस खबर से सब हैरान हुए थे कि उपचुनाव के प्रचार के लिए अशोक गहलोत और सचिन पायलट एक हेलीकॉप्टर में बैठकर जयपुर से वल्लभ नगर और धरियावद गए और वहां मंच साझा किया । मगर असलियत में दोनों ही नेताओं ने एक दूसरे से नज़र तक नही मिलाई । ऐसे में सवाल यह बनता है कि सच में बाहर से मजबूत दिखने वाली यह पार्टी अंदर से ऐसी ही है ?

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हाल ही का एक मामला सामने आया है जब 20 अक्टूबर को वाल्मिकी जयंती के अफसर पर जयपुर के पास चाकसू में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की अष्टघातु की बड़ी मूर्ती का अनावरण कार्यक्रम था । यह कार्यक्रम पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के सबसे नजदीकी माने जाने वाले विधायक वेदप्रकाश सोलंकी की देखरेख में हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा सहित तमाम मंत्रियों और विधायकों को आमंत्रित किया गया। लेकिन कार्यक्रम में केवल सचिन पायलट और उनके गुट के मंत्री ही मौजूद थे । वहीं समारोह में अशोक गहलोत गुट का एक भी मंत्री विधायक या नेता शामिल नहीं हुआ ।

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कार्यक्रम में मंच के पीछे जो बड़े बड़े बैनर लगाए गए थे, उसमें दोनों ही नेताओं की समान फोटो लगाई गई थी । सचिन पायलट के समर्थक अपने नेता को अशोक गहलोत के बराबर तवज्जो देते हैं । लेकिन अंदरखाने में यह चर्चाए भी हो रही थी कि अशोक गहलोत नहीं चाहते की पायलट को उनके बराबर तवज्जो मिले । इसी वजह से गहलोत गुट का एक भी नेता कार्यक्रम में उपस्थित नहीं था । इसके बाद वहा पर कांग्रेस की असली एकता का प्रदर्शन हुआ जब अपने उद्बोधन के दौरान पायलट ने अपनी ही सरकार पर तंज कसे । उन्होंने कहा कि शायद वह दलितो की भलाई के कार्य में बहुत व्यस्त होंगे इसीलिए नहीं आ पाए ।

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साथ ही साथ पायलट ने अपने ही सरकार पर दलितों को नज़रअंदाज करने का आरोप भी लगा दिया । उन्होंने कहा कि मास्टर भंवरलाल मेघवाल एकमात्र दलित कैबिनेट मंत्री थे । उनके निधन के बाद अभी कोई दलित कैबिनेट में नहीं है । पार्टी के अंदर ऐसी एकता और टीम वर्क रहा तो कहीं इसका फायदा अन्य पार्टी को ना हो जाए ।

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