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उत्तराखंड: विशेषज्ञों की राय में कोरोना टीकाकरण से घटेगा ब्लैक फंगस का खतरा

उत्तराखंड: विशेषज्ञों की राय में कोरोना टीकाकरण से घटेगा ब्लैक फंगस का खतरा
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देहरादून: कोरोना संक्रमण महामारी आने के बाद हॉस्पिटल, मरीजों के आंकड़े, दवाइयां। ये कुछ बातें तो जैसे आम हो गई हैं। लोगों में डर का प्रसार अलग ही लेवल पर हुआ है। हालांकि अब टीकाकरण से देश और प्रदेश स्वस्थ होने की राह पर आगे बढ़ रहा है। इसी टीकाकरण की एक खास बात और विशेषज्ञों द्वारा बताई गई है। दरअसल एक्सपर्ट्स का मानना है कि टीकाकरण कोरोना के साथ साथ ब्लैक फंगस के खतरे को भी कम करने का काम करता है।

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जी हां, कोरोना टीका लगने के बाद लोगों के ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) से भी सुरक्षित रहने की संभावना ज्यादा रहती है। इसे विशेषज्ञों के नजरिए देखें तो टीका लगने से इंसान की इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग हो जाती है। जिस कारण वेंटिलेटर, आईसीयू के साथ तमाम साइड इफेक्ट वाले इंजेक्शन व दवाइयों की जरूरत न पड़ने से ब्लैक फंगस का खतरा भी कम हो जाता हैं। अब लाजमी है टीकाकरण के लिए शासन, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग व डॉक्टर्स लोगों को इतना क्यों समझा रहे हैं।

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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं फिजिशियन डॉ. कुमार जी. कॉल के अनुसार कोरोना के दोनों टीके लगने पर इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद मजबूत हो जाती है। इसके बाद कोरोना होने पर भी संक्रमण गंभीर दिक्कतें नहीं कर पता। मतलब मरीज घर में रह कर भी स्वस्थ हो सकता है। इसी कारण टीकाकरण के बाद अस्पताल में फैलने वाले संक्रमण जैसे ब्लैक फंगस के साथ अन्य बीमारियों के होने की भी बहुत कम संभावना रहती है।

श्री महंत इंद्रेश अस्पताल पटेलनगर के वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. जगदीश रावत ने बताया कि कोरोना का टीका लगने के बाद शरीर में एंटीबॉडीज और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। लेकिन इसके बाद भी मास्क पहनना अनिवार्य रहता है। इसके अलावा चूंकि मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती तो वहां से फैलने वाला संक्रमण और बीमारी के गंभीर होने पर दी जाने वाले स्टेरॉयड के साइड इफेक्ट से बचाव हो जाता है। इससे मरीज को ब्लैक फंगस और अन्य साइड इफेक्ट भी नहीं होंगे।

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