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भू-कानून: उत्तराखंड के सभी जिलाधिकारियों व कमिश्नरों को मिले रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश


भू-कानून: उत्तराखंड के सभी जिलाधिकारियों व कमिश्नरों को मिले रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश
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देहरादून: प्रदेश भर में भू-कानून को लेकर गरमा गरमी का माहौल है। ट्विटर से लेकर मंदिरों तक उत्तराखंड मांगे भू-कानून के नारे दिखाई व सुनाई पड़ रहे हैं। इसी बीच विधानसभा सदन से बड़ी खबर सामने आई है। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने भू कानून पर सभी डीएम व कमिश्नरों को विशेष निर्देश दिए हैं।

इस समय उत्तराखंड विधानसभा सदन में मॉनसून सत्र चल रहा है। बुधवार को कांग्रेस विधायक मनोज रावत ने प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950)(संशोधन) विधेयक को रखने की अनुमति मांगी मगर सदन ने इसे बहुमत से खारिज कर दिया।

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कांग्रेस विधायक के मुताबिक भू कानून की चर्चाएं हर तरफ हैं। भूमि अधिनियम में धारा-143(क) और धारा 154 (2) जोड़ने के बाद पहाड़ी व मैदानी इलाकों में कृषि भूमि खरीद की सीमा समाप्त कर दी गई है। लीज और पट्टे पर 30 साल तक भूमि लेने का रास्ता खोला गया है।

इसके अलावा सरकार पर राज्य की भूमि बेचने के आरोप भी लगाए। मगर इसका जवाब कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने दिया। मंत्री ने बताया कि आवासीय उपयोग के लिए 250 वर्गमीटर तक भूमि खरीदने की व्यवस्था वर्तमान में जारी है।

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राज्य में औद्योगिक, पर्यटन, शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए भूमि कानून में संशोधन किए गए हैं। कहा कि ऐसी भूमि को सरकार में निहित करना पड़ेगा जिसपर खरीदे जाने के दो सालों के भीतर भी कार्य प्रारंभ नहीं हुआ। साथ ही डीएम भूमि के अन्य प्रयोजन के लिए इस्तेमाल पर रोक लगा सकते हैं।

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कैबिनेट मंत्री ने राज्य के नागरिकों से भी इस बारे में जागरूक होने की अपील की है। साथ ही भू-कानून को लेकर सभी जिलाधिकारियों और दोनों मंडलायुक्तों से रिपोर्ट मांगी गई है। इसके आधार पर ही आगे कोई भी फैसला लिया जाएगा।

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