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पुलवामा आतंकी हमले में उत्तराखण्ड के दो जवान शहीद, राज्य में उठी बदले की मांग

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नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश में कोहराम मचा दिया है। इस हमले में CRPF के 44 जवान शहीद हुए है। 14 फरवरी को शाम होते हुए सामने आए हमले ने पूरे देश को बदले की आग में छोड़ दिया है। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान से संचालित होने वाले आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद ने ली है। इस हमले को अफजल गुरु स्क्वाड के स्थानीय आतंकी आदिल अहमद उर्फ वकास ने अंजाम दिया। उसने 320 किलो विस्फोटकों से लदी स्कॉर्पियो को सीआरपीएफ के काफिले में शामिल जवानों से भरी एक बस को टक्कर मारकर उड़ा दिया। काफिले में शामिल तीन अन्य वाहनों को भी भारी क्षति पहुंची है।

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घायल जवानों को उपचार के लिए बादामी बाग सैन्य छावनी स्थित सेना के 92 बेस अस्पताल में दाखिल कराया गया है। आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। आतंकियों का निशाना बना वाहन सीआरपीएफ के काफिले का हिस्सा था। सुबह जम्मू से चले इस काफिले में 60 वाहन थे, जिनमें 2547 जवान थे। दोपहर करीब सवा तीन बजे जैसे ही काफिला जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर गोरीपोरा (अवंतीपोरा) के पास पहुंचा। तभी अचानक एक कार तेजी से काफिले में घुसी और आत्मघाती कार चालक ने सीआरपीएफ की 54वीं वाहिनी की बस को टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही धमाका हो गया। इससे बस के परखच्चे उड़ गए। धमाका इतना भयावह था कि कई मील दूर तक आवाज सुनी गई। पल भर में हाईवे पर करीब 100 मीटर के दायरे में क्षत-विक्षत शव व शरीर के अंगों के टुकड़े पड़े हुए थे।

शहीद होने वालों में उत्‍तराखंड के भी दो जवान शामिल हैं। 

शहीद वीरेंद्र सिंह उधमसिंह नगर जिले के खटीमा के मोहम्मदपुर भुढ़िया गांव के रहने वाले हैं। इनके दो छोटे बच्चे है। गुरुवार रात करीब नौ बजे सेना के एक अधिकारी ने उकनी पत्नी को फोन पर शहादत की जानकारी दी है। इसके बाद से घर में कोहराम मचा गया। शहीद वीरेंद्र सिंह राणा के पिता दीवान सिंह है। शहीद वीरेंद्र सिंह के दो बड़े भाई ( जय राम सिंह व राजेश राणा) हैं। जयराम सिंह बीएसएफ के रिटायर्ड सूबेदार हैं, जबकि राजेश राणा घर में खेती बाड़ी का काम देखते हैं। शहीद वीरेंद्र सिंह के बहनोई रामकिशन ने बताया कि वीरेंद्र के दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी 5 साल की, जबकि ढाई साल का बेटा है। उन्‍होंने बताया कि वीरेंद्र दो दिन पहले ही 20 दिन की छुट्टी बिताने के बाद जम्मू के लिए रवाना हुआ था। वहीं, दूसरा शहीद जवान मोहन लाल रतूड़ी उत्‍तरकाशी के चिन्यालीसौड के बनकोट का रहने वाला है। बनकोट निवासी जिला पंचायत सदस्य जोगेंद्र रावत ने बताया कि  मोहन लाल रतूडी (55) शहीद हुए हैं। वर्तमान में मोहन लाल का परिवार देहरादून डिफेंस कालोनी में रहता है। मोहन लाल सीआरपीएफ की 76 वीं वाहिनी में एएसआइ थे।

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