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जय देवभूमि-आस्था तो देखिए,लग्जरी जिंदगी छोड़ स्विट्जरलैंड से पैदल हरिद्वार पहुंचे बाबा बेन



हल्द्वानी: कुछ चीजे ऐसे होती हैं, जिन्हें रुपयों से नहीं खरीदा जा सकता है। कई ऐसे लोगों के बारे में हम सुन चुके हैं जो शहर की जिंदगी को छोड़ पहाड़ों में बस गए हैं और अपना काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि सुख के आगे हर चीज छोटी है। एक ऐसा ही वाक्या सामने आया है लेकिन इसकी शुरुआत स्विट्जरलैंड से हुई। एक युवक के पास सभी कुछ था लेकिन सुकून की कमी उन्हें महसूस हो रही थी। फिर उन्होंने आध्यात्म के रास्ते पर चलने का फैसला किया। भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और योग ने उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल दी और उन्हें अपने जीवन का मकसद दिखाई देने लगा।

इस युवक को भारत अब बेन बाबा के नाम से जानता है। बाबा बेन स्विट्जरलैंड से हरिद्वार पैदल पहुंचे हैं। उन्हें यहां तक पहुंचने के लिए 18 मुल्को की सीमा लांगनी पड़ी। बेन बाबा ने पांच साल में करीब साढ़े छह हजार किलोमीटर पैदल सफर तय किया और हरिद्वार कुंभ स्नान करने पहुंचे। वह पेशे से वेब डिजाइनर हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप में पैसा है, लग्जरी जिंदगी है, लेकिन खुशी नहीं है। खुशी को पैसों से कभी नहीं खरीदा जा सकता है। उन्होंने स्विट्जरलैंड की लग्जरी जिंदगी छोड़कर अध्यात्म और योग में लीन होने का फैसला किया। उन्हें इसके सकारात्मक अनुभव होने लगे तो उन्होंने सनातन धर्म और योग का प्रचार-प्रसार के लिए वह पैदल विश्व यात्रा पर निकल पड़े। बाबा बेन की उम्र केवल 33 साल है।

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वह कहते हैं कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सभ्यता अद्भुत है। योग ध्यान और भारतीय वेद पुराण सबसे मूल्यवान हैं। इनमें अलौकिक ताकत है। इन्ही सब से प्रभावित होकर वह भारत पहुंचे हैं। बाबा ने भारत यात्रा शुरू करने से पहले अपने देश में हिंदी का ज्ञान लिया। पांच साल पहले स्विट्जरलैंड से भारत के लिए पैदल सफर शुरू किया। चार साल के लंबे सफर के बाद भारत के पहुंचे। पांचवें साल में भारत में भ्रमण कर रहे हैं। मंदिरों, मठों में जाकर भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का अध्ययन कर रहे हैं। उत्तराखंड से पहले वह हिमाचल प्रदेश कांगड़ा पहुंचे थे , जहां से उन्हें हरिद्वार पहुंचने में 25 दिन लगे।

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उन्होंने बताया कि असली जिंदगी योग और ध्यान से मिलती है। स्विट्जरलैंड में वे प्रति घंटे 10 यूरो कमाते थे। गाड़ी, घर और लग्जरी लाइफ थी। औसतन प्रति घंटे 10 डॉलर करीब 720 भारतीय रुपये कमाते थे। मन अंदर से बिल्कुल भी खुश नहीं था। भारतीय संस्कृति और योग के बारे में पढ़ा और अध्यात्म एवं योग के लिए स्विट्जरलैंड छोड़ दिया। बेन पतंजलि से योग भी सीख रहे हैं। बेन बाबा ने बताया कि स्विट्जरलैंड से भारत तक पहुंचने तक करीब छह हजार किमी से अधिक पैदल सफर किया।  वे यूरोप से टर्की, इरान, आर्मेनिया, जॉर्जिया, रसिया, किर्गिस्तान, उबेकिस्तान, कजाकिस्तान, चायना, पाकिस्तान समेत 18 मुल्क पार करने के बाद भारत पहुंचे। जिस देश का बॉर्डर आने वाला होता था पहले ही उसके लिए वीजा अप्लाई करते थे।

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अपनी इस यात्रा के दौरान बाबा बेन ने मंदिर, गुरुद्वारा, आश्रम और स्कूल में रात बिताई है। कई बार जंगल और फुटपाथ पर ही खुले आसमान के नीचे रात बिताते हैं। पैदल सफर में रास्ते में खाने के लिए जिसने जो दिया उसे खाकर पेट भरते हैं। हिंदी के अलावा उन्हें गायत्री मंत्र और गंगा आरती कंठस्थ भी ज्ञान है। उन्होंने हरिद्वार में गंगा किनारे अपना ठिकाना बनाया हुआ है। बेन को नंगे पैर गायत्री मंत्र का जाप करते और गंगा आरती करते देख श्रद्धालु भी सकते में पड़ जाते हैं।

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