
KishauDamProject | UttarakhandNews : दशकों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद उत्तराखंड को बिजली उत्पादन और सिंचाई के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना से राज्य को करीब 220 मेगावाट बिजली प्राप्त होगी…जिससे भविष्य में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से कुल 442 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रस्तावित है। इसका लाभ उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों को मिलेगा। उत्पादित बिजली में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की बराबर हिस्सेदारी होगी…जबकि अन्य राज्यों को जल संसाधनों का लाभ मिलेगा।
किशाऊ बांध का निर्माण उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर किया जाना प्रस्तावित है। लगभग 235 मीटर ऊंचा यह बांध एशिया के सबसे बड़े बांधों में शामिल होगा। परियोजना के तहत करीब 32 किलोमीटर लंबी झील का निर्माण भी किया जाएगा।
लंबे समय से वित्तीय और अन्य कारणों से अटकी इस परियोजना को हाल ही में नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद नई गति मिली है। केंद्र सरकार ने परियोजना में उत्तराखंड के हिस्से के खर्च के लिए विशेष वित्तीय सहायता देने पर सहमति जताई है। राज्य को मिलने वाली यह सहायता 50 वर्षों के लिए ब्याजमुक्त ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।
परियोजना के पूरा होने पर हर साल लगभग 1379 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। साथ ही करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलने की संभावना है। इससे कृषि, जल संरक्षण और क्षेत्रीय विकास को भी मजबूती मिलेगी।
हालांकि परियोजना के निर्माण से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ गांव प्रभावित होंगे…लेकिन सरकार का मानना है कि यह परियोजना क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।






