Udham Singh Nagar News

नशे के दलदल में कुमाऊं के बहुत से परिवार, देवभूमि की जड़े हिला रहा है गंदा कारोबार


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रुद्रपुर: चरस और गांजा जैसे नशीले पदार्थ उत्तराखण्ड में बहुत से लोगों का पारिवारिक व्यवसाय बन गया है। कम समय में ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लोग चरस की खेती करने लगे हैं। कुछ दिन पहले पुलिस ने तस्कर फैमिली को पकड़ा है। इस काम को पति –पत्नी, पिता-पुत्र, भाई मिलकर कर रहे थे।

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बीते दिनों पुलिस ने चम्पावत में ही परिवार व अन्य रिश्तेदारो को चरस की तस्करी करते हुए पकड़ा। वही पिछले बुधवार की सुबह उत्तराखण्ड पुलिस ने एक पिता और उसके बेटे को 9 किलोग्राम चरस के साथ रंगे हाथ धर लिया जो की खुद को मुक्तेश्वर के निवासी बता रहे थे । अपराधियों से पूछताछ के बाद पता चला कि बरामद किया गया नशीला पदार्थ हल्द्वानी नैनीताल और आसपास के इलाको में बेचा जाने वाला था । पिछले साल इन्ही दिनों पिता-पुत्र की एक और जोड़ी को पुलिस ने पकड़ा जिनके पास से 11.5 किलोग्राम चरस बरामद की गई थी।

पिछले वर्ष भी चरस का पारिवारिक व्यवसाय करते मां बेटे भी सामने आए जिन्हे टनकपुर से गिरफ्तार किया गया था और उनके पास 1.5 किलो चरस मिली थी। जबकि मई में एक आदमी और उसकी पत्नी को भी 56.20 ग्राम चरस के साथ पकड़ लिया गया । लगभग ये सभी अपराधी चरस बेचने के लिए हल्द्वानी , नैनीताल ,खटीमा अल्मोड़ा जैसे जगहों में आते है।
पहाड़ी क्षेत्रो में भांग की खेती लोग पूरी तरह से करते हैं।

भांग के बहुत से प्रयोग बताए गए हैं, जैसे पकवानों से लेकर दवाईयों तक में इसके इस्तेमाल होने का दावा किया जाता है लेकिन युवाओं ने इसे नशे के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। कोविड महामारी के बाद लोगों की आजीविका में कठिनाई आई तो उन्होंने अपना घर चलाने के लिए इस गैरकानूनी चीज़ को बेचना शुरू कर दिया है। नशे के पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए भांग की खेती को लेकर सरकार को एक सख्त कानून बनाना होगा। अगर ऐसा होता है कि तो इसका उपयोग नियमों के साथ होगा।

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