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क्या आपने कभी उड़ने वाली गिलहरी देखी है? उत्तराखंड में 12 साल बाद दिखी दुर्लभ प्रजाति

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RamnagarNews | FlyingSquirrel |WildlifeRescue : उत्तराखंड के रामनगर से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक खास खबर सामने आई है। यहां कोसी रेंज के टेड़ा गांव में एक दुर्लभ इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल (विशाल उड़न गिलहरी) दिखाई दी…जिसे वन विभाग की टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार को यह दुर्लभ गिलहरी टेड़ा गांव के एक ग्रामीण के घर में पहुंच गई। बड़े आकार और अलग दिखने के कारण ग्रामीण हैरान रह गए। सूचना मिलने पर कोसी रेंज के रेस्क्यू एक्सपर्ट आशीष कश्यप और राजेश कश्यप मौके पर पहुंचे और सावधानीपूर्वक गिलहरी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

जांच में पता चला कि यह इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल प्रजाति की है। वन विभाग के अनुसार रामनगर क्षेत्र में यह प्रजाति करीब 12 साल बाद फिर से देखी गई है। इससे पहले वर्ष 2014 में इसे ढिकुली-गार्जिया वन क्षेत्र में दर्ज किया गया था।

यह गिलहरी वास्तव में उड़ती नहीं है…बल्कि अपने पैरों के बीच मौजूद त्वचा की झिल्ली (पेटागियम) की मदद से एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लगभग 60 मीटर तक हवा में ग्लाइड कर सकती है। यह एक रात्रिचर (रात में सक्रिय रहने वाला) वन्यजीव है।

वन विभाग ने कहा कि उत्तराखंड में यह प्रजाति रानीखेत, लैंसडौन, पिथौरागढ़, चकराता और मसूरी के जंगलों में भी पाई जाती है। अधिकारियों का कहना है कि रामनगर क्षेत्र में इसका दोबारा दिखाई देना यहां की समृद्ध जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक संकेत है।

उप प्रभागीय वनाधिकारी अंकित बडोला ने कहा कि रेस्क्यू के बाद गिलहरी को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया जाएगा। साथ ही इस दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी को विभागीय रिकॉर्ड में भी दर्ज किया जाएगा।

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