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2019 विश्व कप में धोनी और अब भारतीय महिला हॉकी टीम, भुलाने वाले नहीं हैं ये आंसू

2019 विश्व कप में धोनी और अब भारतीय महिला हॉकी टीम, भुलाने वाले नहीं हैं ये आंसू

नई दिल्ली: टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीमों ने जो कर दिखाया है, उसे सदियों तक याद रखा जाएगा। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने मेडल जीतकर दिल जीता तो वहीं महिला टीम मेडल ना जीत कर भी हर देशवासी के दिलों पर छा गई। महिला टीम की हर खिलाड़ी मैच के बाद भावुक थी। खिलाड़ियों के साथ पूरा देश रोया था। वाकई ये आंसू कभी भुलाए नहीं जा सकेंगे।

दरअसल भारतीय महिला टीम ने टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन किया। ये पहली बार था जब महिला हॉकी टीम ओलंपिक के सेमीफाइनल में खेलने के लिए उतरी। हालांकि मुकाबले में अर्जेंटीना और उसके बाद ब्रॉन्ज मेडल मैच में ग्रेट ब्रिटेन के सामने हार का सामना करना पड़ा।

लेकिन भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ियों ने इस टूर्नामेंट में एक उम्मीद की किरण दिखाई है। जिसे हम दर्शकों को सपोर्ट करना है। आपको याद होगा 2019 क्रिकेट विश्व कप के सेमीफाइनल में धोनी की बेहद हताश और निराश होने वाली तस्वीरें सामने आई थी।

धोनी के आंसुओं के बाद बीसीसीआई ने टीम में कई बदलाव किए। इन आंसुओं की कीमत हर दर्शक जानता है। रुलाने वाले क्षण हमेशा आते रहते हैं। मगर ध्यान रखने योग्य बात ये होती है कि हम उन आंसुओं को भूल गए या उनको याद कर इतिहास रच गए।

इधर महिला हॉकी टीम के प्लेयर्स भी मैदान पर ही फूट-फूटकर रोने लगे थे। सविता पूनिया, वंदना कटारिया, कप्तान रानी रामपाल और नेहा गोयल समेत तमाम खिलाड़ी इमोशनल हो गए। इन आंसुओं की कीमत धोनी के आंसुओं के बराबर हो या ना हो, मगर ये आंसू अगर याद रखे गए तो इतिहास रच सकते हैं।

बता दें कि भारतीय खिलाड़ियों के सम्मान में प्रतिद्वंदी टीम की खिलाड़ियों ने भी खड़े होकर तालियां बजाईं। अगर हॉकी टीम के इस सफर को किसी अंजाम तक पहुंचाना है तो हमें इन आंसुओं को याद रखना होगा।

ओलंपिक के इतिहास की बात करें तो यह भारत का तीसरा ओलंपिक था। इससे पहले मास्को (1980), रियो ओलंपिक (2016) के लिए भारत ने क्वालीफाई किया था। पहले ओलंपिक में भारत अंतिम रूप से चौथे स्थान पर रहा था, लेकिन उस साल बहिष्कार के कारण सिर्फ छह टीमों ने ओलंपिक में हिस्सा लिया था।

इसके बाद भारत ने 2016 के रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया, लेकिन वह 12 टीमों के टूर्नामेंट में अंतिम स्थान पर रही थी। भारत को पूल स्तर पर पांच मैचों में सिर्फ एक ड्रॉ नसीब हुआ था। टोक्यो ओलंपिक के ब्रांज मेडल मैच में मिली हार लाखों जीतों से बड़ी है। क्योंकि इस हार में महिलाओं ने जीत की किरण दिखाई है।

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