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उत्तराखंड में अब पिरूल नुकसान नहीं, फायदा पहुंचाएगा, फैक्ट्री आउटलेट की हुई शुरूआत


Uttarakhand news: ‘पिरूल लाओ-पैसा पाओ’ उत्तराखंड का एक ऐसा मिशन है जिससे यहां के जंगलों को आग से बचाने के लिए शुरू किया गया। इस मिशन से न सिर्फ उत्तराखंड के जंगलों को आग से बचाया जा रहा है बल्कि यह मिशन स्थानिय लोगों को रोजगार देने में भी काफी लाभदायक सिद्ध हो रहा है।

मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर राज्य में ‘पिरूल लाओ-पैसे पाओ’ मिशन को शुरू कर दिया गया है जिसके तहत पिरूल कलेक्शन सेंटर पर 50 रुपये प्रति किलो की दर से पिरूल खरीदे जाएंगे। जबकि इससे पहले पिरूल की कीमत काफ़ी कम 2 से 3 रुपए प्रति किलो थी। पिरूल के मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि से राज्य में पिरूल के माध्यम से विभिन्न वस्तुओं को तैयार करने वाले काश्तकारों को भी इसका फायदा मिलेगा। एक और जहां वनाग्नि की घटनाओं पर काबू पाया जाएगा वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के लिए भी यह आजीविका का नया साधन बनेगा। वहीं उत्तराखंड में अब पिरूल नुकसान नहीं बल्कि यहां के स्थानिय लोगों को फायदा पहुंचाएगा। जिसके तहत उत्तराखंड में फैक्ट्री आउटलेट की शुरूआत भी हो चुकी है।

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उत्तराखंड के पहाड़ की खूबसूरती का हर कोई दिवाना है। हर साल देश- विदेश से लाखों पर्यटक यहां की खूबसूरती और सुकून भरी जिंदगी जिने के लिए उत्तराखंड के पहाड़ो की तरफ खींचे चलें आते हैं। लेकिन इस वर्ष उत्तराखंड के जंगलों को न जाने किसकी नगर लग गई है। आग लगने से पहाड़ के जंगलों जलकर खाक हो गए हैं। वनाग्नि से जहां एक तरफ जंगलों को भारी नुकसान पहुंचा हैं वहीं यहां रह रहे कई जानवार भी आग की चपेट में आ गए हैं। साथ ही जंगलों की आग शहर तक भी पहुंच रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री धामी द्वारा पिरूल लाओ- पैसा पाओ मिशन का आगाज किया गया है।

वैसे तो पहाड़ों में हर जगह आपको पिरूल गिरे हुए दिख जाएंगे। यह सुंदर तो लगते हैं लेकिन इनमें आग भी बहुत तेजी से लगती है। यही अहम कारण भी है जिससे जंगलों में लगी आग भी एकदम से विक्राल रूप ले लेती है। यही कारण है कि धामी सरकार ने राज्य में वनाग्नि की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए पिरूल को जंगलों से हटाने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री धामी का मुख्य उद्देश्य जंगल की आग को रोकना और नियंत्रित करना है। सरकार की इस नई पहल में पिरूल को जंगल से हटाने के साथ साथ स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने की योजना है।

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