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देवस्थानम बोर्ड के बाद अब भू-कानून की बारी! उत्तराखंड CM धामी ने बुलाई कमेटी की बैठक


देवस्थानम बोर्ड भंग होने के बाद भू-कानून की बारी, उत्तराखंड सरकार ने तेज की तैयारी
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देहरादून: प्रदेश सरकार ने अब भू-कानून को लेकर भी कसरत तेज कर दी है। संभावना हैं कि आगामी विधानसभा सत्र (Assembly session) में सरकार इस पर कोई विधेयक पेश कर दे। ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि सीएम धामी ने सात दिसंबर को उस कमेटी के अहम बैठक बुलाई है जिसे उन्होंने भू कानून के लिए गठित किया था।

गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने बीते दिनों एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) ने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत (Former CM Trivendra Singh Rawat) द्वारा दो साल पहले लिए गए देवस्थानम बोर्ड (Devsthanam Board) गठन के फैसले को पलट दिया। लगातार चलते आ रहे तीर्थपुरोहितों के विरोध के बाद अब जाकर देवस्थानम बोर्ड को भंग किया गया है।

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इसके लिए सीएम धामी की तारीफ हो रही है। तीर्थपुरोहितों में भी खुशी की लहर है। इसी बीच इंटरनेट पर काफी समय से प्रचलित भू कानून (Land law) का मुद्दा फिर से उठ रहा है। बता दें कि उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम पर फैसला करने के बाद प्रदेश सरकार पर भू कानून को लेकर दबाव बनता जा रहा है।

भू कानून को लेकर हो रहा संघर्ष काफी समय से चल रहा है। सख्त भू कानून को लेकर इंटरनेट मीडिया (internet media) में लंबे समय से मुहिम चल रही है। राज्य के साथ ही प्रवासी उत्तराखंडी सख्त भू कानून की पैरवी कर रहे हैं। युवाओं का कहना है कि भू कानून की उत्तराखंड को जरूरत है वरना वे अपने ही प्रदेश में बाहरी हो जाएंगे।

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अब सरकार ने इसको लेकर कवायद शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भू कानून को लेकर पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में जो कमेटी गठित की थी। जिसकी बैठक सीएम धामी ने सात दिसंबर को देहरादून (Dehradun meeting) में बुला ली है। बैठक में 163 सुझावों पर विचार होगा। माना जा रहा है कि जन सुनवाई के बाद समिति अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे सकती है।

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सीएम धामी भी पहले इसकी ओर इशारा कर चुके हैं। हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की तर्ज पर सख्त भू कानून लाने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। इसलिए काफी जल्दी इसे लाया जा सकता है। ऐसा हो गया तो उत्तराखंड सरकार को वोटर्स का भी खासा साथ मिल जाएगा। पहले भी देवस्थानम बोर्ड भंग कर सरकार काफी वोटरों को अपने पक्ष में कर चुकी है।

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