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हल्द्वानी के अजय महरा की बड़ी उपलब्धि, परमाणु ऊर्जा विभाग में वैज्ञानिक बनकर किया उत्तराखंड का नाम रोशन

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AjayMehra | Haldwani | Scientist | UttarakhandNews : उत्तराखंड के हल्द्वानी के युवा अजय महरा ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ी सफलता हासिल करते हुए देश के परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy) में वैज्ञानिक पद पर चयन प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे नैनीताल जिले और उत्तराखंड में खुशी का माहौल है।

मूल रूप से नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक के भद्रकोट गांव निवासी अजय महरा बचपन से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी रहे हैं। उन्होंने हल्द्वानी के सेंट लॉरेंस पब्लिक स्कूल से हाईस्कूल में 96 प्रतिशत अंक और इंटरमीडिएट उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ पास किया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई पूरी की….जहां उन्हें मेधावी छात्र के रूप में छात्रवृत्ति भी मिली।

उच्च शिक्षा के लिए अजय ने एमबीजीपीजी कॉलेज हल्द्वानी से एमएससी (भौतिक विज्ञान) की पढ़ाई की। उन्होंने जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF-NET) परीक्षा भी उत्तीर्ण की। वर्ष 2026 में आयोजित GATE परीक्षा में उन्होंने पूरे देश में 22वीं रैंक हासिल की। इसके बाद परमाणु ऊर्जा विभाग में फिजिक्स विषय के कुल 29 वैज्ञानिक पदों के लिए हुए चयन में उन्होंने सफलता प्राप्त की।

अजय महरा की सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने पूरी पढ़ाई के दौरान किसी भी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। उन्होंने केवल सेल्फ स्टडी के दम पर यह मुकाम हासिल किया…जो आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का बड़ा उदाहरण है।

अजय के पिता धरम सिंह महरा असम राइफल्स में कार्यरत हैं। उनकी माता दीपा महरा का तीन वर्ष पहले कैंसर के कारण निधन हो गया था। कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद अजय ने पढ़ाई जारी रखी और अपनी मां की बीमारी के दौरान उनकी देखभाल भी करते रहे। उनकी छोटी बहन काजल महरा भी प्रतिभाशाली छात्रा हैं और उन्होंने आईआईटी जैम परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 325 हासिल की है।

अपनी सफलता पर अजय महरा ने इसका श्रेय अपने माता-पिता, परिवार और लगातार की गई मेहनत को दिया। उनकी उपलब्धि पर शिक्षा, सामाजिक और व्यापारिक क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि अजय ने उत्तराखंड के युवाओं के लिए नई प्रेरणा पेश की है।

अजय महरा की यह उपलब्धि साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए…तो सफलता जरूर मिलती है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे उत्तराखंड को गर्व महसूस हो रहा है।

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