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वक्फ संपत्तियों की जांच पर सख्ती, गढ़वाल कमिश्नर ने 10 दिन में मांगी रिपोर्ट

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Waqf Properties | Uttarakhand | Dehradun : उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में हो रही देरी पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गढ़वाल कमिश्नर कार्यालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 10 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए…ताकि मामले का समय पर निस्तारण किया जा सके।

जानकारी के अनुसार वक्फ संपत्तियों में रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ियों और संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के आधार पर जांच के आदेश दिए गए थे…लेकिन अब तक कई मामलों की रिपोर्ट लंबित है। इसे देखते हुए कमिश्नर कार्यालय ने देहरादून जिलाधिकारी को पत्र भेजकर जांच प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है।

बताया जा रहा है कि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने शासन को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि वक्फ बोर्ड की कई महत्वपूर्ण संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं और रिकॉर्ड में भी कई तरह की विसंगतियां हैं। शिकायत के बाद शासन ने संबंधित जिलों में जांच के निर्देश जारी किए थे।

इसी क्रम में देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर के जिलाधिकारियों से राजस्व अभिलेखों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर वक्फ संपत्तियों की स्थिति का सत्यापन कर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया था। जांच का उद्देश्य सरकारी रिकॉर्ड और वक्फ बोर्ड के अभिलेखों का मिलान कर किसी भी प्रकार की अनियमितता, रिकॉर्ड में हेरफेर या अवैध कब्जे की स्थिति का पता लगाना है।

कमिश्नर कार्यालय ने अब स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित मामलों को लैंड फ्रॉड समन्वय समिति के समक्ष भी रखा जा सकता है…जिससे आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।

वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा है कि उन्होंने पहले भी वक्फ संपत्तियों में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया था और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उनका कहना है कि जिलाधिकारियों की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी तथा यदि अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वहीं देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने कहा है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और जांच प्रक्रिया में तेजी लाकर निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट भेजने का प्रयास किया जाएगा। अब सभी की नजरें जिलों से आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं…जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

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