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पुलिस में जाने को छोड़ी कई नौकरी,टिहरी की रीना बनी डिप्टी एसपी, खेती करते हैं पिता

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टिहरी: बेटियां जब उड़ान भरती हैं तो वे नीचे नहीं देखती। एक बार फिर एक बेटी ने अपने घर परिवार और क्षेत्र का नाम ऊंचा किया है। मूल रूप से टिहरी के मुनि की रेती क्षेत्र निवासी रीना राठौर ने पुलिस विभाग में डिप्टी एसपी बनने तक का सफर एक साधारण परिवार से निकल कर पूरा किया है।

रीना राठौर का परिवार खेती व किसानी के लिए जाना जाता है। रीना के सामने अपनी शिक्षा से जुड़ी भी कई दिक्कतें आईं लेकिन उन्होंने सबका डट कर सामना किया। बता दें कि रीना ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर हर क्लास में टॉप किया है।

इसके बाद ऋषिकेश आकर ग्रेजुएशन और फिर पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद रीना को तत्कालीन सीएम भुवनचंद्र खंडूड़ी द्वारा बेहतर मार्क्स के लिए स्कॉलरशिप के तौर पर 55 हजार रुपए भी दिए गए थे। लाजमी है कि पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े होने के नाते रीना के ऊपर जिम्मेदारी भी अधिक थी। जिसको उन्होंने बाखूबी निभाया।

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दिल्ली से आइएएस की तैयारी करने के लिए दिल्ली जाने वाली रीना का चयन खंड विकास अधिकारी के पद पर हुआ। लेकिन उन्होंने उसे ज्वाइ नहीं किया। बहरहाल इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग से परीक्षा देने के बाद वो उप शिक्षा अधिकारी के तौर पर कुछ साल सेवाएं दी।

चयन सीआरपीएफ में असिस्टेंड कमांडेंट के पद पर भी हुआ था, लेकिन रीना ने पुलिस सेवा ज्वाइन करने के लिए ये जॉब भी छोड़ दी। कानून व्यवस्था से जुड़ने की चाह के कारण रीना राठौर का चयन अब उत्तराखंड पुलिस में बतौर डिप्टी एसपी हुआ है।

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बता दें कि गुरुवार को पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय नरेंद्रनगर में हुई पासिंग आउट परेड में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने रीना राठौर को सर्वोत्तम प्रदर्शन करने पर स्वार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया। रीना ने बताया कि उन्हें डॉक्टर बनना था लेकिन खर्चे के कारण उन्होंने वह नहीं किया।

रीना राठौर के अनुसार ने द्वारीखाल में उप शिक्षा अधिकारी रहते हुए खुद के खर्चे पर बच्चों को अंग्रेजी की शिक्षा दी थी। जिसकी बदौलत क्षेत्र के 15 से ज्यादा बच्चों का चयन नवोदय विद्यालय में हो गया। लिहाजा अब इस बेटी ने डिप्टी एसपी के पद पर पहुंचकर ये साबित कर दिया की वाकई बेटियां कुछ भी कर सकती हैं।

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