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चमोली में कुदरत का कहर: देहरादून से जोशीमठ के लिए रवाना हुआ एमआई-17


हल्द्वानी: चमोली में आए कुदरत के कहर ने दुनिया को एक बार फिर उत्तराखंड की ओर खींच दिया है। सारी दुनिया, पूरा भारत उत्तराखंड के लिए दुआएं मांग रहा है। मलबे के नीचे दबे और तड़प रहे लोगों को बाहर निकालने की कवायद की जा रही है। सुरंग में फंसे व्यक्तियों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। राहत बचाव कार्य के लिए एमआई 17 एनडीआरएफ के जवानों को लेकर जोशीमठ पहुंचने वाला है।

आइटीबीपी, एसडीआरएफ, सेना, जिला प्रशासन की टीम रेस्क्यू आपरेशन में लगी हुई हैं। रातभर चले ऑपरेशन में सुरंग से 130 मीटर तक मलबा हटाया जा चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऋषिगंगा में आई बाढ़ में कम से कम 197 लोग अभी भी नहीं निल सके हैं। ये लोग कहां हैं, इसका कोई भी अंदाज़ा नहीं है। कई लोग टनल में फंसे हुए हैं। ऐसे ही करीब 35 मजदूरों को निकालने की कोशिश की जा रही है।

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वहीं मंगलवार को राहत बचाव कार्य का तीसरा दिन शुरू होते ही कामों में और तेज़ी आई है। शासन, प्रशासन, स्थानीय लोग, अपनी तरफ से कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इधर, एमआई 17 एनडीआरएफ के जवानों को लेकर देहरादून से जोशीमठ के लिए रवाना हो गया है। उम्मीद है कि पहले से राहत के कार्यों में जुटे जवानों को और मदद मिल सकेगी। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को तपोवन और ग्लेशियर क्षेत्र में ले जाने के लिए एक एएलएच भी रवाना हो गया है।

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आपको बता दें कि अबतक 26 शव निकाले जा चुके हैं, इनमें से 24 की पहचान भी की जा चुकी है। सभी शव टनल से और आसपास के क्षेत्रों में नदियों के किनारे से मिले हैं। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टनल में जवान थोड़ा और आगे बढ़ गए हैं। जानकारी यह भी है कि अभी टनल खुली नहीं है। डीजीपी ने उम्मीद जताई है कि दोपहर तक टनल खुल जाएगी। साथ ही बता दें कि अधिकारियों के मुताबिक आज सारा मलबा साफ होने की उम्मीद है।

कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने भी जानकारी दी है। बताया कि राज्य सरकार धौलीगंगा आपदा के कारणों का विस्तृत अध्ययन कराएगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसरो की सैटेलाइट इमेज के आधार पर बर्फ का पहाड़ खिसकने को घटना का कारण बताया है। बर्फ खिसकने की यह घटना क्यों और कैसे हुई, इसकी पड़ताल कराई जाएगी।

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