Dehradun News

उत्तराखंड का लाल नहीं रहा… शूटर जसपाल राणा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर

Ad

Jaspal Rana : Shooting: Uttarakhand News : भारतीय निशानेबाजी को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने वाले देश के महान शूटर और कोच जसपाल राणा अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार को 49 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। खेल जगत, राजनीति और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

दिल्ली के अस्पताल में अंतिम सांस लेने के बाद जसपाल राणा का पार्थिव शरीर देर शाम उनके देहरादून स्थित आवास लाया गया…जहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लग गया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण समेत कई जनप्रतिनिधियों और खेल हस्तियों ने उनके घर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

अपने गुरु को अंतिम विदाई देते समय रो पड़ीं मनु भाकर

जसपाल राणा की सबसे चर्चित शिष्यों में शामिल ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर भी अपने गुरु को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचीं। पार्थिव शरीर के सामने पुष्प अर्पित करते समय मनु खुद को संभाल नहीं सकीं और उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा सिर्फ एक कोच नहीं…बल्कि भारतीय निशानेबाजी के एक पूरे युग थे। उनका मार्गदर्शन और अनुभव आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

मुख्यमंत्री धामी बोले- देश ने खोया एक महान खिलाड़ी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जसपाल राणा का जाना सिर्फ उत्तराखंड ही नही…बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि राणा ने अपने खेल कौशल से भारत का नाम दुनिया भर में रोशन किया और बाद में कोच बनकर नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने देश को कई मेडल दिलाने के साथ-साथ ऐसे खिलाड़ियों को तैयार किया जिन्होंने भारत का गौरव बढ़ाया।

जर्मनी से लौटने के बाद बिगड़ी थी तबीयत

जानकारी के अनुसार जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिता से भारतीय टीम के साथ लौट रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।

डॉक्टरों के अनुसार उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया था। उपचार के दौरान उनकी हालत में सुधार भी देखा गया था और उन्हें जल्द अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अचानक हृदय संबंधी जटिलता बढ़ने के कारण शुक्रवार सुबह उनका निधन हो गया।

टिहरी के बेटे ने दुनिया में चमकाया भारत का नाम

28 जून 1976 को उत्तराखंड के टिहरी जिले में जन्मे जसपाल राणा बचपन से ही निशानेबाजी के प्रति आकर्षित थे। उनके पिता नारायण सिंह राणा ने उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण दिया। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना शुरू कर दिया था।

सिर्फ 12 साल की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पदक जीतकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का झंडा बुलंद करते रहे।

कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के चमकते सितारे

जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में कुल 23 पदक जीतकर इतिहास रचा। इनमें 13 स्वर्ण पदक भी शामिल हैं।

कॉमनवेल्थ खेलों में उन्होंने 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक जीते…जबकि एशियाई खेलों में 4 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक अपने नाम किए। उनकी उपलब्धियों ने भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

खिलाड़ी से कोच बने और तैयार की नई पीढ़ी

प्रतियोगी खेलों से दूरी बनाने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने भारतीय शूटिंग टीम के साथ काम करते हुए कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तैयार किया।

मनु भाकर, सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे कई अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजों की सफलता के पीछे उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। उनकी कोचिंग और मार्गदर्शन ने भारतीय शूटिंग को नई दिशा दी।

सम्मान और उपलब्धियों से भरा रहा जीवन

जसपाल राणा को खेल जगत में उत्कृष्ट योगदान के लिए कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उत्तराखंड सरकार ने भी उन्हें प्रदेश के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा था।

‘बंदूक्या’ के नाम से थे मशहूर

उत्तराखंड में लोग उन्हें प्यार से “बंदूक्या जसपाल राणा” कहकर पुकारते थे। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने उनके नाम पर प्रसिद्ध गीत भी रचा था…जिसने उन्हें गांव-गांव तक पहचान दिलाई।

शनिवार को होगा अंतिम संस्कार

परिवार के अनुसार शनिवार को उनके पार्थिव शरीर को वाराणसी ले जाया जाएगा…जहां पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

जसपाल राणा के निधन के साथ भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे खिलाड़ी, कोच और प्रेरणास्रोत को खो दिया है…जिसने अपने जुनून, मेहनत और समर्पण से लाखों युवाओं को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा दी। उनकी उपलब्धियां और योगदान हमेशा देशवासियों के दिलों में जीवित रहेंगे।

Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad
To Top