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ओलंपिक में सफलता के बाद सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई हॉकी को राष्ट्रीय खेल घोषित करने की PIL

ओलंपिक में सफलता के बाद सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई हॉकी को राष्ट्रीय खेल घोषित करने की PIL
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नई दिल्ली: टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष व महिला हॉकी टीमों द्वारा शानदार प्रदर्शन करने के बाद एक बार फिर देश में खेल को राष्ट्रीय खेल घोषित करने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में हॉकी को राष्ट्रीय खेल घोषित करने हेतु एक पीआईएल दायर की गई है।

अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर इस जनहित याचिका में क्रिकेट के साथ साथ ओलंपिक में खेले गए सभी खेलों के बेहतरीकरण को लेकर ध्यान देना चाहिए। अधिवक्ता ने एएनआई को बताया कि हॉकी को राष्ट्रीय खेल माना जाता है जबकि इस तरह की कोई पुष्टि भारत सरकार ने नहीं की है।

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विशाल तिवारी ने याचिका में कहा कि ओलंपिक में खेले गए खेलों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न खेल समूहों को आगे आना चाहिए। साथ ही खेलों के प्रसारण के लिए भी अलग से कुछ कदम उठाने चाहिए। लाजमी है कि कई खेलों का अच्छे ढंग से प्रसारित ना हो पाना भी उन्हें दर्शकों से दूर रखता है।

अधिवक्ता ने ओलंपिक में खेले गए खेलों को स्कूल व कॉलेज के स्तर पर खिलाने व कमेटियां गठित कर खेलों की निगरानी के लिए भी निर्देश मांगे। याचिका में विशाल तिवारी ने कहा कि हॉकी भारत के लिए हमेशा से गर्व का केंद्र रहा है। भारत ने हमेशा इस खेल में अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि 41 साल बाद भारत ने ओलंपिक हॉकी में मेडल अपने नाम किया है।

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इसलिए हॉकी को राष्ट्रीय खेल बनाया जाना चाहिए। साथ ही कहा कि भारतीय क्रिकेट ने भी लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। देश को बहुत से सितारे दिए हैं। मगर कई जगहों पर स्ट्रगल भी किया है। जबकि हॉकी ने अपनी लोकप्रियता यूओआई के सपोर्ट के बगैर कुछ हद तक खो दी। अगर अच्छा साथ रहे तो हॉकी भारत को इससे भी अधिक गौरव के पल प्रदान कर सकती है।

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याचिका में कहा यूओआई के साथ बाकी खेल समूहों या केंद्र व राज्यों ने इस खेल को आगे बढ़ाने के लिए कुछ खास इंतजाम नहीं किए हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों का आर्थिक स्तर ध्यान रखने के लिए भी काम नहीं किया गया। इसलिए अब जरूरत है कि नई पॉलिसी, नियम खेलों के लिए बनाए जाएँ ताकि बड़े लेवल पर दूसरे देशों से भिड़ने में मदद मिले। खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए भी तरह तरह के काम होने चाहिए।

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