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डिजिटल होने की राह पर उत्तराखंड पुलिस,टैबलेट से मिलेगी केस सॉल्व करने में मदद

डिजिटल होने की राह पर उत्तराखंड पुलिस,टैबलेट से मिलेगी केस सॉल्व करने में मदद
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देहरादून: डिजिटल होने से सबसे बड़ा फायदा सहूलियत के रूप में ही मिलता है। जब आधुनिक ज़माने में हर चीज डिजिटल हो रही है तो पुलिस भी पीछे क्यों रहे। अब उत्तराखंड पुलिस भी आधुनिकता का दामन थामने के प्रयास में है। अपने अधिकारियों के लिए केस डायरी की बजाय मोबाइल टैबलेट की व्यवस्था पुलिस महकमा कर रहा है। यह कोई कहने की बात नहीं कि पुलिस के डिजिटल होने से ना सिर्फ उन्हें बल्कि जनता को भी फायदा होगा।

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होता यह है कि एफआईआर होने के बाद जांच अधिकारी हर केस के है पहलू को अपनी केस डायरी में दर्ज करते हैं। जिसमें पहले ही इतना समय लगता है। इसके बाद जांच पूरी होने के बाद इसे कंप्यूटर पर टाइप करना होता है। इसलिए काफी ज्यादा समय लग जाता है। जांच अवधि भी इस वजह से खासा प्रभावित होती है।

अब यह होगा कि टैबलेट आने से जांच अधिकारी जांच के दौरान तुरंत ही जानकारियों को नोट करेंगे और साथ ही फोटो व वीडियो भी निकाल पाएंगे। जिसे बाद में टेबलेट पर ही या फिर कम्प्यूटर पर आसानी से संपादित किया जा सकेगा। गौरतलब है कि इससे रिपोर्ट भी जल्दी तैयार होगी और लंबित मामलों की परेशानी भी दूर हो सकेगी।

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बता दें कि फिलहाल पहले चरण में केवल 45 वर्ष से ऊपर वाले या कंप्यूटर की जानकारी रखने वाले अधिकारियों को ही टैबलेट सौंपे जाएंगे। मतलब कुल मिलाकर प्रदेश के सभी 160 थानों और 237 पुलिस चौकियों में तैनात 1500 पुलिस अधिकारियों को यह मोबाइल टेबलेट दिए जाने हैं। पहले चरण में 595 अधिकारियों को लाभ मिलेगा। जिसमें हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल के अलावा अन्य जिलों के पुलिस महकमे को भी ये सुविधा मिलेगी।

पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता डीआइजी नीलेश आनंद भरणो ने बताया कि अब मोबाइल टैब की व्यवस्था केस डायरी के जगह अधिकारियों के लिए की जा रही है। पहले चरण में थाने के अधिकांश महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंटेशन जिसमें चार्जशीट, फाइनल रिपोर्ट, सर्च, सीजर, अरेस्ट जैसे सभी साक्ष्यों को डिजिटलाइज किया गया। केवल केस डायरी डिजिटल होना बाकी थी, जिसे अब डिजिटल किया जा रहा है। इससे अधिकारियों को फायदा होगा और जांच भी जल्दी होगी।

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